बदायूं। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के प्रवेश के दौरान जन्मतिथि दर्ज करने में लापरवाही अब नहीं चलेगी। परिषद की ओर से स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चे के प्रथम प्रवेश के समय दर्ज की जाने वाली जन्मतिथि को केवल औपचारिकता के तौर पर न लिया जाए। इसे उपलब्ध प्रमाणित अभिलेखों के आधार पर ही दर्ज किया जाए। कक्षा एक में प्रवेश के समय माता-पिता या अभिभावक की ओर से शपथ पत्र दिए जाने पर ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
विद्यालय में पहली बार दर्ज की गई जन्मतिथि को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यही जन्मतिथि आगे चलकर छात्र के हाईस्कूल के प्रमाणपत्र समेत अन्य शैक्षिक अभिलेखों में दर्ज की जाती है। इसलिए प्रथम प्रवेश के समय जन्मतिथि में किसी तरह की गलती होने पर भविष्य में छात्र-छात्राओं को अभिलेखों में संशोधन कराने के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है।
कक्षा एक में प्रवेश के दौरान यदि निर्धारित प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हैं तो माता-पिता अथवा अभिभावक की ओर से दिए गए शपथ पत्र के आधार पर जन्मतिथि दर्ज करने की व्यवस्था होगी। इसके बाद विद्यालयी अभिलेखों में दर्ज यही जन्मतिथि छात्र के शैक्षिक रिकॉर्ड में आगे भी आधार बनेगी। ऐसे में अभिभावकों को शपथ पत्र में जन्मतिथि सोच-समझकर और सही जानकारी के साथ दर्ज करानी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षिक अभिलेखों में जन्मतिथि को लेकर होने वाली गड़बड़ियों और बाद में संशोधन की मांग को रोकना है। विद्यालय स्तर पर पहली बार दर्ज होने वाली जन्मतिथि को ही आगे के रिकॉर्ड में निरंतरता के साथ इस्तेमाल किया जाएगा। - नवीन कुमार, बीएसए