सहसवान। गंगा नदी उफनाईं और सहसवान क्षेत्र के तोफिया नगला, वीरसहाय नगला, खागी नगला, भमरौलिया, तेली नगला और गिरधारी नगला गांवों में पानी भर गया है। इन गांवों को प्रशासन खाली करा रहा है। यहां के अधिकतर ग्रामीण घर छोड़कर गंगा-महावा तटबंध पर बसेरा बना रहे हैं। इससे लोगों का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। ऐसे हालात में ग्रामीणों के साथ ही मवेशियों के लिए खाने का संकट हो गया है।
सहसवान तहसील क्षेत्र में गंगा नदी किनारे 39.4 किलोमीटर का तटबंध बनाया गया है। गंगा का जलस्तर बढ़ा तो किनारे छह गांवों में सबसे पहले पानी पहुंचा। कई दिन से लोग इंतजार कर रहे थे पानी कम होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले आठ दिन से लगातार गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चल रहा है। सोमवार को जलस्तर खतरे के निशान से 60 सेमी ऊपर चला गया। इससे इन छह गांवों के घरों में तीन से चार फीट तक पानी भर गया। ऐसे में लोग अब घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। प्रशासन कई दिन से इन लोगों को घर खाली करने के लिए कह रहा था। अब पानी बढ़ा लोग घर छोड़कर गंगा-महावा तटबंध पर आ गए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों के लिए आश्रय स्थल बनाया है लेकिन वह तीन किलोमीटर दूर है। इसलिए ग्रामीण वहां न जाकर तटबंध पर रुके हैं। वहीं पर पॉलीथिन लगाकर परिवार सहित रुक गए है।
क्या बोले ग्रामीण
- बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है। अब सभी घरों में पानी घुस गया है। अधिकांश लोग तटबंध पर पहुंच गए हैं। यहीं पर आशियाना बना लिए हैं, जिससे बाढ़ के पानी से सुरक्षित रहेंगे। - बबलू, तोफिया नगला
- बाढ़ आने से पशुओं को दिक्कत हो रही है। चारा खेतों में नष्ट हो गया है। भूसा भीग गया है। पशुओं का पेट भरना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन की ओर से सूखी खाद्य सामग्री दी गई है। इसके अलावा भी बहुत सी घर की जरूरत की चीजें नहीं हैं। -श्याम सिंह, वीरसहाय नगला
घर में पानी घुसने पर परिवार सहित छत पर रह रहे थे। सोमवार की सुबह पानी और बढ़ा तो परिवार सहित तटबंध पर पहुंचे और झोपड़ी बनाई। बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। खाने-पीने का सभी सामान पानी से खराब हो गया है। -करन सिंह, तोफिया नगला
छोटे बच्चों को जहरीले कीड़ों का डर बना हुआ है। बड़े लोग तो बच भी जाते हैं। लगातार सांप निकल रहे हैं। बच्चों को छत पर भी चारपाई से नीचे नहीं उतरने दे रहे हैं। लगातार पानी बढ़ने से मुश्किलें बढ़ती ही जा रहीं हैं। -सूरज पाल, गिरधारी नगला
तटबंध पर रोशनी की व्यवस्था करने की मांग
गांव में पानी भरने के बाद तटबंध पर आश्रय बना लिया है। वहां पर रात में रोशनी की व्यवस्था नहीं है। यहां सांप व अन्य जहरीले कीड़ों के डंसने का डर है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों को हो रही है। लोगों ने तहसील प्रशासन से रोशनी की व्यवस्था कराने की गुहार लगाई है। एसडीएम प्रेमपाल सिंह का कहना है कि तटबंध पर बिजली की व्यवस्था जल्द शुरू करवा दी जाएगी।
कोट,
- जो गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, उनकी निगरानी लगातार की जा रही है। राहत सामग्री वितरित की जा रही है। गांवों में स्वास्थ्य कैंप भी आयोजित किए जा रहे हैं। किसी को दिक्कत नहीं होने दी जा रही है। अगर किसी को दिक्कत हो तो वह फोन कर सकता है। तत्काल समस्या का समाधान कराया जाएगा। - प्रेमपाल सिंह, एसडीएम सहसवान
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों को ऐसे बनाए गए हैं आश्रय स्थल। संवाद
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों को ऐसे बनाए गए हैं आश्रय स्थल। संवाद
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों को ऐसे बनाए गए हैं आश्रय स्थल। संवाद
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों को ऐसे बनाए गए हैं आश्रय स्थल। संवाद
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों को ऐसे बनाए गए हैं आश्रय स्थल। संवाद
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों को ऐसे बनाए गए हैं आश्रय स्थल। संवाद
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों को ऐसे बनाए गए हैं आश्रय स्थल। संवाद
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों को ऐसे बनाए गए हैं आश्रय स्थल। संवाद