शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए हर गांव के प्राइमरी स्कूल में ग्राम शिक्षा समिति के जरिए शिक्षामित्रों की तैनाती की गई थी। जो व्यक्ति अपने गांव में सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा होता था, उसका ग्राम शिक्षा समिति चयन का प्रस्ताव भेजती थी। उसके अभिलेख भी विभाग को भेजे जाते थे। शिक्षामित्रों ने सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन के लिए कई बार आंदोलन भी किए थे। प्रदेश सरकार ने चरणबद्ध तरीके से शिक्षामित्रों को दो साल की पत्राचार बीटीसी कराने के बाद सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित कर दिया।
समायोजित हुए शिक्षामित्रों के अभिलेखों का संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय से सत्यापन कराया गया। अमर उजाला को जब फर्जीवाड़े की भनक लगी तो बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा से इसकी तस्दीक करने का प्रयास किया गया। बीएसए ने बताया कि जिले में 137 शिक्षक के पदों पर समायोजित हुए शिक्षामित्रों के अभिलेख सत्यापन में फर्जी निकले हैं। बोले, इनमें अधिकांश शिक्षामित्र ऐसे हैं जिन्होंने नियुक्ति के समय ग्राम शिक्षा समिति को दूसरे अभिलेख दिए थे। जब सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हो गए तो दूसरे अभिलेख प्रस्तुत किए। सत्यापन में उनके फर्जी अभिलेख होने का मामला उजागर हुआ है। बीएसए ने कहा कि ऐसे समायोजित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसकी तैयारी चल रही है।
पहले दो शिक्षक हुए थे बर्खास्त
बेसिक में इससे पहले भी कई शिक्षकों को फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने के मामले में बर्खास्त किया जा चुका है। कुछ दिन पहले ही विकासखंड इस्लामनगर क्षेत्र के दो शिक्षकों को बर्खास्त किया गया था।
1500 शिक्षामित्र हुए समायोजित
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में लगभग 1500 शिक्षामित्रों को अध्यापक पद पर समायोजित किया जा चुका है। इन सभी के अभिलेखों का संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय से सत्यापन कराया जा रहा है। संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने वाले शिक्षामित्रों के अभिलेखों की बारीकी से जांच कराई जा रही है।