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रोडवेज चौराहा बना डग्गामार बसों का अड्डा, डीएम ने दो बसें कराईं सीज

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बदायूं। डीएम शुक्रवार को अचानक रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे तो बाहर चौराहे पर डग्गामारी का अड्डा उन्हें नजर आया। इन बसों ने रोडवेज का बेड़ा गर्क कर रखा है। हालत देखकर गुस्साए डीएम ने दो बसें सीज करा दीं। इनमें से एक बस तो ऐसी थी, जिसका रंग इस तरह किया गया था कि लोग परिवहन निगम की ही समझें। इससे पहले भी इस तरह की फर्जी एक बस पकड़ी गई थी, मगर तब उसे सिर्फ चालान करके छोड़ दिया गया था।
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जिन डग्गामार बसों के खिलाफ परिवहन निगम के कर्मचारी करीब एक माह तक धरना प्रदर्शन करते रहे, अधिकारियों से मांग करते रहे कि डग्गामार बसें चौराहे से हटवाई जाएं लेकिन डग्गामार बसों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। करीब एक-दो दिन के लिए बंद भी हो गईं तो दूसरे या तीसरे दिन फिर से शुरू हो गईं। परिणाम यह रहा कि परिवहन निगम को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान होता रहा परंतु कभी बसें बंद नहीं हो सकीं। शुक्रवार सुबह डीएम दिनेश कुमार सिंह अचानक रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे। बाहर चौराहे पर डग्गामार बसें खड़ी थीं। आमतौर पर इसी चौराहे से सवारियां ज्यादा चढ़ती हैं। चौराहा पर उन्हें रोडवेज चौराहे पर करीब चार बसें दिखाईं दीं। वहां इनमें दो डग्गामार बसें थीं और दो बसें अन्य डिपो से आई थीं। एक डग्गामार बस उप्र परिवहन निगम के रंग में खड़ी थी। उसमें कई सवारियां बैठीं थीं और उसके चालक-परिचालक बरेली-बरेली की आवाज भी लगा रहे थे। डीएम ने तुरंत एआरटीओ प्रवर्तन सोहेल अहमद को स्टैंड बुलाया और बसों के कागजात चेक कराने के आदेश दिए। इनमें दो डग्गामार बसों के तो परमिट ही नहीं निकले। इसके बावजूद डग्गामार बसें बदायूं से बरेली रोड पर चलाईं जा रही थीं। डीएम के अचानक छापामारी के दौरान कुछ चालक अपनी डग्गामार बसें लेकर मौके से भाग गए। गनीमत रही कि उन पर डीएम की नजर नहीं पड़ी थी। वरना वो बसें भी सीज कर दी जातीं। चौराहे से पकड़ी गईं दो डग्गामार बसें एआरटीओ शेखूपुर पुलिस चौकी ले गए और उन्हें तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया।
डीएम ने मौके से पकड़ी गईं तीन अन्य बसों के कागजात चेक करने के आदेश दिए हैं। डीएम ने कहा है कि चौराहे पर कोई डग्गामार बस खड़ी पाई जाए, परिवहन निगम के अधिकारी और कर्मचारी तुरंत इसकी सूचना दें। जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई हो सके।
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-रोडवेज चौराहे पर काफी समय से डग्गामार बसों ने अपना कब्जा जमा लिया है। परिवहन निगम के कर्मचारी इसका विरोध करते आए हैं। करीब आठ माह पूर्व कर्मचारियों ने स्टैंड परिसर में धरना प्रदर्शन किया था। करीब एक माह तक प्रदर्शन चला। अंत में उन्होंने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी थी। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों से लेकर डीएम तक से शिकायत की गई थी। डीएम के आदेश पर कुछ समय के लिए बसें हो गईं। मात्र तीन या चार दिन बीते थे कि फिर से डग्गामार बसें शुरू हो गईं। तब से आज भी डग्गामार बसों का बोलबाला है।
-परिवहन निगम के कर्मचारियों की शिकायत पर डीएम ने डग्गामार बसों के खिलाफ कार्रवाई को एक कमेटी गठित की थी, जिसमें एडीएम प्रशासन, एसडीएम सदर, एआरटीओ प्रवर्तन, सीओ सिटी, सिविल लाइंस इंस्पेक्टर समेत कई अधिकारियों को शामिल किया गया था। आदेश थे कि कोई डग्गामार बस चौराहे पर खड़ी मिल जाए तुरंत उसके खिलाफ कार्रवाई करें। लेकिन धीरे-धीरे सभी अधिकारी इससे किनारा कर गए।
-धरना प्रदर्शन के दौरान प्राइवेट बस संचालकों के बीच अधिकारियों की एक बैठक भी हुई थी, जिसमें साफ-साफ कह दिया गया था कि कोई भी बस रोडवेज चौराहे पर आकर खड़ी नहीं होगी। जो भी बस खड़ी करना है उसे प्राइवेट बस स्टैंड ले जाएं। अन्यथा बस को सीज कर दिया जाएगा। फिर भी अधिकारियों के आदेश हवा में उड़ा दिए गए।
-डग्गामार बसों का रोडवेज बस स्टैंड पर कोई ऐसे ही कब्जा नहीं है। जो बस पकड़ी भी जाती है, उसे छूटने में 24 घंटे भी नहीं लगते। बस उन्हें जुर्माना भरना पड़ता है। उसके बाद बस आकर फिर रोडवेज चौराहे पर खड़ी हो जाती है। यह डग्गमार बसें कभी दो दिन के लिए थाने में खड़ी नहीं हुईं। यही वजह है जिससे इनके संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
रोडवेज चौराहे पर चार बसें खड़ी मिलीं थीं, जिनमें दो बसों को सीज कर दिया गया है, जबकि दो बसों के कागजात सही थी। हमने उनके कागजात ऑनलाइन चेक किए हैं। इसके अलावा शुक्रवार को कई वाहन चेक किए गए थे। सीट बेल्ट और हेलमेट में करीब 42 वाहनों के चालान किए गए।
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सोहेल अहमद, एआरटीओ प्रवर्तन
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