उझानी (बदायूं)। बरेली-मथुरा हाईवे पर सब्जियों से भरी पिकअप टायर फटने के बाद अनियंत्रित होकर पलट गई। पिकअप पर सवार 15 सब्जी विक्रेता सवार थे। हादसे में चालक समेत 12 लोग घायल हो गए। घायलों में दो सगे भाई भी शामिल हैं। सड़क से गुजर रहे लोगों ने सब्जियों के कट्टों के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया। जहां से सभी घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। तीन की हालत गंभीर बनी हुई है।
हादसा बुधवार सुबह करीब नौ बजे गांव धर्मपुर मोड़ के पास हुआ। मुजरिया थाना क्षेत्र के कई लोग आसपास इलाके की साप्ताहिक पैंठ में सब्जी बेचने का काम करते हैं। सुबह में उन्होंने मंडी समिति से सब्जियां खरीदीं। इसके बाद वह उन्हें पिकअप में लोड कर वितरोई की साप्ताहिक पैंठ के लिए निकले। रास्ते में अचानक ही पिकअप का पिछला पहिया फट गया। जिससे पिकअप पर अनियंत्रित होकर हाईवे पर पलट गई।
सब्जियों के कट्टों के ऊपर बैठे सब्जी विक्रेताओं में धूरीनगला निवासी गोविंद (18) पुत्र बनवारी लाल, मोनू (19) पुत्र अमरसिंह, मुनेंद्र (25) पुत्र राजेंद्र, राजकिशोर (40) पुत्र जीवाराम, हरसिंहपुर निवासी रामनिवास (18) पुत्र छोटेलाल, गांव ज्योरा पारवाला निवासी सुनील (30) पुत्र चुन्नीलाल और उसका भाई अनिल (26) समेत 12 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर काफी देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा। पिकअप मुजरिया के गांव धूरीनगला निवासी जितेंद्र चला रहा था। घायलों में गोविंद, मोनू और सुनील की हालत गंभीर है।
घायलों को जमीन पर लिटाकर करना पड़ा इलाज
उझानी। हादसे के बाद दो एंबुलेंस घायलों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची तो उस समय इमरजेंसी में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। फार्मेसिस्ट और बार्ड ब्वॉय ने ही घायलों के नाम और पते नोट कर उनकी मरहम-पट्टी शुरू कर दी। दो घायलों को तो ड्रेसिंग रूम में जमीन पर लिटाकर ही इंजेक्शन लगाने पड़ गए। उसी हालत में उनके पट्टी भी बांध दी गई। हालांकि चिकित्साधीक्षक सुयश दीक्षित भी इमरजेंसी में पहुंच गए लेकिन तब तक घायलों को जिला अस्पताल रेफर किए जाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
ड्रेसिंग रूम में दो मरीजों को लिटाने की व्यवस्था है। घायलों की संख्या चूंकि सात थी, इसलिए किसी ने उन्हें फर्श पर ही लिटा दिया। ऐसा उनके तीमारदारों ने ही किया था, इसीलिए जमीन पर उनका इलाज भी शुरू कर दिया गया।
- सुयश दीक्षित, चिकित्साधीक्षक