अब कौन कराएगा जात... कहकर बिलख उठे परिजन
अल्लापुर चमारी ही नहीं, बल्कि इलाके का ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो 80 साल के रामेश्वर भगतजी को नहीं जानता हो। घर से गोगामेड़ी रवाना होने से लेकर लौटने तक जहां भी श्रद्धालु पूजन करते हैं, भगतजी ही मंत्रोच्चार करते थे। उनके बिना गोगामेड़ी कोई नहीं जाता। श्रद्धालुओं के साथ उनके बेटे यादराम और नाती-नातिन भी थे। हादसे में भगतजी की मौत की जानकारी परिजनों को मिली तो वह यह कहते हुए बिलख उठे कि अब आगे जात कौन कराएगा।
बुजुर्ग बेगमवती की मौत से परिजन बदहवास
उझानी इलाके के गांव निजामपुर निवासी बुजुर्ग बेगमवती पत्नी मुन्नालाल भी अल्लापुर चमारी के श्रद्धालुओं के साथ उसी पिकअप में सवार थी, जो हादसे का शिकार हुई है। वह पिछले वर्षों में भी दो- तीन बार गोगामेड़ी जाकर जात कर चुकी थीं, लेकिन इस बार की जात उनकी अंतिम साबित हुई। उनकी मौत से परिवार के लोग बदहवास हैं। गांव के रौनक यादव ने बताया कि गोगामेड़ी जाने को उन्हें पूरे परिवार ने विदा किया था। उनकी मौत के बारे में पता लगा तो लोग सिहर उठे। उनके बेटे प्रदीप और कुंवरपाल भी ग्रामीणों के साथ बागपत चले गए।
फोड़ा-फुंसी का देशी इलाज करते थे सुगड़पाल
बागपत हादसे में जान गंवाने वाले चेतूनगला गांव के सुगड़पाल के बारे में गांव के राजीव यादव ने बताया कि वह अपने भतीजे विपिन की पिकअप से जात करने गए थे। पिकअप को विपिन चला रहे थे। तीन संतान में सबसे छोटा बेटा निखिल उनके साथ था। बेटा और भतीजे घायल हैं। सुगड़पाल फोड़ा-फुंसी का देशी इलाज करने में माहिर थे। दूरदराज से लोग उन्हें इलाज करने के लिए बुलाकर ले जाते थे। गोगामेड़ी जाने से दो दिन पहले उन्होंने सहसवान क्षेत्र में महिलाओं का इलाज भी किया। इलाके के लोग उन्हें बिसरिया कहकर पुकारा करते थे।
छह भाई बहन में सबसे छोटा था जितेंद्र
जरीफनगर के मुरादपुर उस्मानपुर निवासी नैनपाल के पांच बेटे और एक बेटी में जितेंद्र सबसे छोटा था। नैनपाल के भाई मुनेश ने बताया कि उनके भाई खेती किसानी करते हैं। वह सबसे छोटे बेटे जितेंद्र और पत्नी सुल्तानश्री के साथ गोगामेड़ी दर्शन करने गए थे। इसी दौरान बागपत में ये हादसा हो गया। नैनपाल और सुल्तानश्री गंभीर रूप से घायल हो गए, जितेंद्र की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि हादसे में दंपति की आंत फट गई, जिसका ऑपरेशन किया गया है।
प्रेम सिंह के घर बाहर खड़े लोग।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अल्लापुर चमारी में गमगीन माहौल पड़ोसियों के घरों में नहीं जले चूल्हे
बागपत हादसे में मृतकों में सर्वाधिक संख्या अल्लापुर चमारी के श्रद्धालुओं की रही है। पूरे दिन गांव का माहौल गमगीन रहा। दोपहर तक गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकारियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ तो लोग घरों से बाहर दिखे। मृतकों के पड़ोसियों के घरों में तो चूल्हे भी नहीं जले। उनके चेहरे पर भी हादसे का दर्द साफ दिखाई दे रहा है। प्रधान श्रीपाल ने बताया कि रविवार रात करीब दो बजे जब उन्हें हादसे के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने घर से बाहर निकलकर दो- तीन लोगों के घर जाकर जानकारी की। जिन्हें हादसे के बारे में नहीं पता था, उन्हें भी बताकर उन लोगों के बारे में जानकारी की गई जो गोगामेड़ी गए थे।