जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम को लगा बड़ा झटका
अलग-अलग कैंपों में कराई थी 2300 महिलाओं ने नसबंदी
परिवार नियोजन कार्यक्रम को जिले में बड़ा झटका लगा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में नसबंदी कराने के बावजूद एक साल में 75 महिलाएं गर्भवती हो गईं। जिले के 15 ब्लॉकों और जिला महिला अस्पताल में समय-समय पर लगे कैंपों में करीब 2300 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। नसबंदी फेल होने के मामलों में अब महिलाओं को मुआवजा दिया जाएगा।
जनसंख्या नियंत्रण के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाती हैं। इसके तहत समय-समय पर नसबंदी कैंपों का आयोजन किया जाता है। नसबंदी कराने पर महिलाओं को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वर्ष 2016 में जिले के 15 ब्लॉकों और महिला अस्पतालों में में समय-समय पर आयोजित नसबंदी कैंपों करीब 2300 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। साल का आखिरी महीना चल रहा है। जिले भर से अब तक नसबंदी होने के बावजूद महिलाओं के गर्भवती होने के 75 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 35 मामलों में मुआवजे के लिए रिपोर्ट महानिदेशक परिवार कल्याण जगत नारायण गौड़ को भेजी गई है।
नसबंदी फेल होने के मामले में प्रत्येक महिला को मुआवजे के रूप में 30 हजार रुपये देने होंगे। इस तरह जिले में अगर सभी 75 महिलाओं को मुआवजा देना पड़ता है तो 22.50 लाख रुपये की चपत लगेगी। सीएमओ डॉ. नरेंद्र कुमार का कहना है कि नसबंदी फेल होने के कुछ मामले सामने आए हैं। कुछ मामलों में फाइल महानिदेशक को भेज दी गई है। इसके साथ ही कई मामलों में पड़ताल की जा रही है।
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- क्यों फेल होती है नसबंदी
वरिष्ठ सर्जन डॉ. अवधेश कुमार के मुताबिक नसबंदी के दौरान महिला की एक नस में रिंग डाल कर उसे बंद कर दिया जाता है। नसबंदी कामयाब रहे इसके लिए जरूरी है कि कम से कम दो महीने तक शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। अक्सर देखने में आया है कि दो महीने से पहले शारीरिक संबंध बनाने से महिला गर्भवती हो जाती है। कुछ मामलों में रिंग सही ढंग से अपनी जगह पर न पहुंचने की वजह से नसबंदी फेल भी हो जाती है।