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Budaun News: सभासद व गुलफाम की पत्नी समेत 10 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज

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बदायूं। गुलफाम के आत्महत्या के प्रयास के मामले में शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने उसकी पत्नी-साले, सभासद समेत दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। गुलफाम का बरेली के एसआरएमएस में इलाज चल रहा है। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
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नई सराय निवासी गुलफाम ने दो दिन पहले एक जनवरी को एसएसपी कार्यालय में आत्मदाह का प्रयास किया था। गुलफाम का दो साल पहले नई सराय की सनोवर से विवाह हुआ था। शादी के बाद दोनों में विवाद रहने लगा। इसके बाद सनोवर मायके में आ गई। तभी से दोनों के बीच में मुकदमेबाजी चल रही है। गुलफाम और सनोवर ने एक दूसरे के ऊपर मुकदमे दर्ज करा रखे हैं।
गुलफाम का कहना है कि 2 दिसंबर को उसकी पत्नी व ससुराल वालों ने सभासद रहीउद्दीन के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट की व उसका ई-रिक्शा छीन लिया। इस मामले में उसने पुलिस पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। घटना के बाद एसएसपी ने जांच पड़ताल कराई। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर बृहस्पतिवार को कोतवाल राकेश सिंह को निलंबित कर दिया।
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इस मामले में शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने गुलफाम की पत्नी सनोवर, साले निहाल, मुनाजिर, शाकिर, इसरार, इकरार के अलावा जैब, शाहरुख, दिनेश, सभासद रहीउद्दीन के खिलाफ ई रिक्शा लूटने, गाली गलौज करने, जाने से मारने की धमकी देने व रंगदारी मांगने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की है।
एसएसपी बृजेश सिंह का कहना है कि गुलफाम अहमद का बरेली के राममूर्ति मेडिकल कालेज में उपचार कराया जा रहा है। वहां एक उप निरीक्षक एवं दो आरक्षी की ड्यूटी लगाई गई है।


एसएसपी कार्यालय में गेट के बाहर लगाए गए सीसीटीवी

एसएसपी कार्यालय पर बुधवार को गुलफाम द्वारा किए गए आत्मदाह के प्रयास के बाद वहां की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बृहस्पतिवार को कार्यालय के गेट को बंद कर वहां पुलिस कर्मियों की तैनाती कर दी गई थी, जो आने वाले लोगों की तलाशी ले रहे थे। शुक्रवार को गेट पर सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए गए। अब हर समय सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। बता दें कि कार्यालय के अंदर परिसर में तो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन बाहर नहीं थे।


चर्चा में रहे कोतवाली इंस्पेक्टर राकेश सिंह

गुलफाम के आत्महत्या के प्रयास के मामले में एसएसपी ने प्रारंभिक जांच के बाद इंस्पेक्टर राकेश सिंह को हटा दिया। राकेश सिंह तीन महीने कोतवाली के इंचार्ज रहे। इस दौरान उनकी कार्यप्रणाली जिले में चर्चा में रही। फार्मासिस्ट शाकिर हत्याकांड में जिस तरह से खेल हुआ हर कोई देखकर दंग रह गया। पहले महिला को हत्या के आरोप में जेल भेज दिया गया। फिर उसे निर्दोष बताकर जेल से बाहर निकलवा दिया गया। आज तक पुलिस शाकिर का शव बरामद नहीं कर सकी। इतना ही नहीं लूट के एक मामले में करीब दो लाख रुपये से ज्यादा दूसरे प्रदेश में जाकर बरामद कर लिए, लेकिन आरोपियों का नाम तक पुलिस को पता नहीं चल सका। कहा गया कि पुलिस को देखकर बदमाश नोटों से भरा थैला फेंककर भाग गए थे।
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