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उझानी में मिला छह साल पहले गायब झारखंड का युवक

Sat, 24 Oct 2015 07:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
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दिल्ली के एनजीओ ने निभाई अहम भूमिका, रमेश को पाकर घरवाले खुश

चार साल तक दिल्ली में रखा गया बंधुआ मजदूर की तरह

 
रमेशचंद्र झारखंड की राजधानी रांची के बसिया थाना क्षेत्र में गुमला निवासी मोतीलाल का इकलौता बेटा है। मोतीलाल को दिल्ली के एनजीओ के जरिए पता लगा कि रमेश उझानी कोतवाली क्षेत्र के गांव सकरीजंगल निवासी मुगीश के पास है। मुगीश ने ही एनजीओ को रमेश के बारे में अवगत कराया था। एनजीओ को मुगीश ने अपना सेलफोन नंबर और पता भी भेजा था। मोतीलाल, उसकी पत्नी नागी और बेटी नानू तड़के एनजीओ के साथ सकरीजंगल पहुंच तो उन्हें रमेश से मिलवा दिया गया। मां-बाप और बहन से मिलन के साक्षी बने ग्रामीणों में प्रधान रिजवान अहमद ने बताया कि मुगीश दिल्ली में व्यापार करता है। करीब दो साल पहले रमेश उसे दिल्ली में मिल गया था। बाद में वह मुगीश के साथ ही रहने लगा। मुगीश के संपर्क में आने से पहले रमेश ने दिल्ली के एक होटल में काम किया। बकौल रमेश, होटल में उसे बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया। मालिक उसे बाहर निकलने नहीं देता था। खाने को रोटी और पहनने को कपड़ों के अलावा कुछ और नहीं दिया जाता था। तीन साल तक रमेश ने होटल में काम किया। शुरूआती साल में वह दिल्ली के किसी दबंग के चंगुल में रहा। दबंग के जरिए ही वह होटल तक पहुंचाया गया था। इधर, मुगीश ने रमेश को उसके परिवार को सौंपे जाने की अभिलेखीय औपचारिकता कोतवाली आकर पूरी कराई। दोपहर में रमेश को लेकर एनजीओ के साथ उसके घरवाले चले गए लेकिन कोतवाली में रमेश से उके परिजनों के मिलन का जो भी साक्षी बना, वह भावुक हो उठा।
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नक्सली हमलों से डरा रहता था रमेशचंद्र
उझानी। छह साल मिले बेटे रमेश के बारे में मोतीलाल की मानें तो झारखंड के कुछेक इलाकों में नक्सली हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं। जब भी कोई घटना होती, तब-तब रमेश सहम जाता था। एक घटना के बारे में सुनकर छह साल पहले वह गायब हो गया। उसे किसी ने अगवा नहीं किया था। वह तो स्वेच्छा से ही घर छोड़कर निकल पड़ा था। पिता को शक है कि उसके दिलो-दिमाग पर नक्सली घटनाओं को खौफ छा गया। मोतीलाल के साथ पहुंचे एनजीओ से जुड़े कार्यकर्ता ने नाम गोपनीय रखने की कहकर बताया कि रमेश को उसके घरवालों से मिलाने में एसे एक महीना तक मशक्कत करनी पड़ी।
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