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Budaun News: सौ एजेंट घर-घर घूमकर दोगुनी रकम लौटाने का लालच देकर फंसाते थे लोगों को

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बदायूं। अमर ज्योति यूनिवर्सल निधि कंपनी के नाम पर करीब 800 करोड़ रुपये की ठगी रकम दोगुनी करने का लालच देकर लोगों को फंसाया गया था। बदायूं में कंपनी शुरू होने के बाद दूसरे नामों से भी यह सिलसिला करीब 22 साल तक चला। सालभर या तय अवधि तक रकम जमा करने पर 18 प्रतिशत तक ब्याज जोड़कर अच्छी रकम मिलने की योजना बताने के लिए सौ से ज्यादा एजेंट घर-घर घूमते थे। ठगी का असर सबसे ज्यादा असर उन स्थानीय निवेशकों पर पड़ा, जिन्होंने एजेंटों की बात पर भरोसा कर अपनी मेहनत की कमाई कंपनी में जमा कराई थी।
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शुरुआत में निवेशकों को पासबुक और अन्य दस्तावेज देकर कंपनी ने भरोसा कायम कर लिया था। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोगों ने छोटी-छोटी रकम जमा करनी शुरू कर दी। कंपनी की ओर से अधिक ब्याज और रकम दोगुनी देेने जैसे दावे भी किए जाते थे। इससे नौकरीपेशा, दुकानदार, मजदूर और अन्य छोटे निवेशक भी इसकी योजनाओं से जुड़ते चले गए। बदायूं के करीब 20 हजार और आसपास के बरेली, पीलीभीत जैसे शहरों के करीब 15 हजार लोग जुड़े। जब निवेश की रकम बढ़ी और लोगों ने अपनी एफडी व जमा धनराशि वापस मांगनी शुरू की तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा। पिछले साल पीड़ित निवेशकों ने कंपनी के कार्यालय का घेराव कर रकम वापस दिलाने की मांग की थी। सौ तहरीरों के साथ तीन सौ शिकायती पत्र पुलिस थानों तक पहुंचे तो कंपनी संचालक दोनों भाई भाग गए।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सूर्यकांत मौर्य और शशिकांत मौर्य के खिलाफ बदायूं और बरेली में नौ केस दर्ज हैं। इनमें पांच केस आशु बंसल, अरविंद पाल सिंह परमार, अशद अहमद, अंकित कुमार और पवन कुमार गुप्ता ने कोतवाली में दर्ज कराए थे।
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चार मामलों में हाईकोर्ट से चल रहा है स्टे
-बदायूं की कोतवाली में दर्ज चार मामलों में हाईकोर्ट से स्टे चल रहा है, जबकि जुलाई में दर्ज एक अन्य मामले में दोनों की गिरफ्तारी की गई। 50-50 हजार के इनामी दोनों भाइयों की गिरफ्तारी के बाद निवेशकों को अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, निवेशकों की कुल जमा रकम और उनकी वापसी की प्रक्रिया आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगी।


ठेले वालों से लेकर अधिवक्ताओं तक ने लगाया पैसा, अब रकम वापसी का इंतजार

अमर ज्योति कंपनी की कथित योजनाओं में निवेश करने वालों में केवल बड़े निवेशक ही नहीं थे, बल्कि रोज कमाकर परिवार चलाने वाले लोग भी शामिल थे। ठेला लगाने वालों, छोटे दुकानदारों और मजदूरी करने वालों ने रोजमर्रा की बचत से रकम जमा की थी। व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और अधिवक्ताओं ने कंपनी में पैसा लगाया था।
एजेंटों के लगातार संपर्क और बेहतर ब्याज के लालच में लोगों को लगा कि उनकी रकम सुरक्षित हाथों में है। कई छोटे निवेशक रोजाना या साप्ताहिक बचत से पैसा जमा करते रहे। रोज रकम जमा करने के लिए बाकायदा पासबुक भी दी गई थीं, जिनमें रकम चढ़ती थी। किसी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए रकम जोड़ी तो किसी ने भविष्य की जरूरतों के लिए बचत कंपनी में जमा की थी। व्यापारियों ने कारोबार से बची रकम निवेश की, कुछ पेशेवर लोगों ने भी कंपनी पर भरोसा किया। कंपनी बंद होने और भुगतान रुकने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी छोटे निवेशकों को उठानी पड़ी। जमा रकम वापस लेने के लिए लोग कंपनी के कार्यालय के चक्कर काटते रहे। पिछले वर्ष निवेशकों के आक्रोश के बाद कंपनी कार्यालय का घेराव भी किया था।

जुलाई में दर्ज कराई गई एफआईआर में हुई गिरफ्तारी
4 जुलाई को कोतवाली थाने में आशु बंसल ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि शशिकांत मौर्य के परिवार से पूर्व से परिचय था। शशिकांत मौर्य अमर ज्योति फाइनेंस लिमिटेड नाम से फाइनेंस कंपनी चलाते थे। आरोप है कि परिचय और विश्वास का हवाला देकर उन्होंने कंपनी में रकम जमा करने के लिए कहा और बेहतर रिटर्न देने का भरोसा दिलाया। वर्ष 2020 से 2023 के बीच अलग-अलग तारीखों में करीब 30 लाख रुपये जमा कराए थे। आरोप लगाया कि रकम जमा करने के बाद कंपनी ने एफडीआर भी दी और समय पूरा होने पर पूरी राशि लौटाने का आश्वासन दिया। बाद में जानकारी हुई कि कंपनी बंद कर संचालक और उनके परिजन चले गए। संपर्क करने के प्रयास भी सफल नहीं हुए। साजिश के तहत उनकी जमा रकम हड़पने के उद्देश्य से कूटरचित जमा पर्चियां दीं। आशु बंसल की ओर से शशिकांत मौर्य, उनकी पत्नी अर्चना देवी, भाई सूर्यकांत मौर्य, पुत्र विशुकांत मौर्य और कंपनी के मैनेजर एसके सिंह को शामिल किया गया।

पिछले वर्ष कई केस दर्ज होने के बाद सामने आया कि अमर ज्योति नाम से कुछ कंपनियां बदायूं और बरेली से संचालित की गईं, जो लोगों को दुगुना पैसा देने का लालच देकर काफी मात्रा में रकम जमा कराती थीं। इसमें कुल 9 केस दर्ज किए गए थे। डीआईजी की ओर से पिछले वर्ष जुलाई में दोनों भाईयों पर 50-50 हजार इनाम घोषित किया था। एसटीएफ गौतमबुद्धनगर और बदायूं पुलिस की संगठित कार्रवाई में दोनों को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है। एक करोड़ रुपये दोनों के खाते में सीज कराए हैं। - अंकिता शर्मा, एसएसपी
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