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दस साल पहले बने नालों को नया दिखाकर निकाल लिए 3.09 लाख रुपये

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दातागंज। तहसील क्षेत्र के गांव कनकपुर में मौजूदा प्रधान और संबंधित कर्मियों द्वारा विकास के नाम पर किया गया घपला उजागर हुआ है। दस साल पहले बने नाले का भुगतान नया दिखाकर फिर से निकाल लिया गया। यही नहीं, दो आवास भी नियम विरुद्ध स्वीकृत लाभार्थियों के स्थान पर दूसरों को दे दिए गए। इन मामलों में प्रधान और संबंधित कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। गांव कनकपुर में दो दिन पहले नोडल अधिकारी धीरज साहू ने दौरा कर विकास कार्यों का स्थलीय मुआयना किया था। इसी दौरान कुछ लोगों ने नोडल अधिकारी को अवगत कराया कि गांव में दो नालों को जो निर्माण दिखाया जा रहा है, यह नाले करीब दस साल पहले के बने हुए हैं। इस बात को सुनकर नोडल अधिकारी भी चौंक गए। उन्होंने तत्काल बीडीओ दातागंज को जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए। जांच में शिकायत सही पाई गई। उजागर हुआ कि एक नाले की रकम 1.71 लाख और दूसरे की 1.38 लाख रुपये दर्शाकर नए की मद में प्रधान और संबंधित कर्मियों ने निकाल लिए। तकनीकी टीम ने भी दोनों नालों का काम होते हुए के फोटो और निर्माण सामग्री के बिल बाउचर लगाकर फाइल पूरी कर दी।
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ये था दूसरा मामला
नोडल अधिकारी के सामने यह भी शिकायत की गई कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2011 की जनगणना की सूची में रामचंद्र पुत्र हीरालाल का नाम था। इन्हीं के नाम आवास स्वीकृत हुआ, लेकिन बनवाया गया हीरालाल पुत्र रामचंद्र का। इसी तरह प्रकाश पुत्र नत्थू के नाम से स्वीकृत आवास प्रकाश पुत्र गिरधारी को दे दिया गया। यह वर्ष 2016-17 में बनाया गया। नियमानुसार एकाउंट और आधार कार्ड नंबर दोनों स्वीकृत सूची के व्यक्ति के हो तभी कंप्यूटर उसे रिसीव करेगा, लेकिन सांठगांठ से न होने वाले इस काम को भी अंजाम दे दिया गया।
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चार अपात्र लाभार्थियों से लिया गया धन वापस
ब्लाक समरेर के खंड विकास अधिकारी एपी सिंह के मुताबिक गांव सराय पस्तौर में दो, मनकापुर कौर और सादुल्लागंज में एक-एक अपात्र व्यक्ति को प्रधानमंत्री आवास दे दिया गया था। जो बन भी गए। जांच में मामला सामने आने पर उन चारों से धन की रिकवरी कर ली गई है।
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दोनों मामलों में विधिक राय ली जा रही है। घपला किया है यह तो जांच में साफ हो गया है। अब सभी संबंधितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इस मामले में पूर्व में रहे आवास पटल का कार्य देख रहे व्यक्ति की भूमिका भी संदिग्ध है।
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-अभय प्रताप सिंह, बीडीओ, दातागंज
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