गंगा का जलस्तर बढ़ने से कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर हो गया है। कछला गंगाघाट पर कांवड़ियों को गहरे में जाने से रोकने को गंगा में बैरीकेडिंग के साथ लाल झंडियां लगाई जा रही हैं। लाल झंडियों का मतलब है खतरे का निशान। गंगा में नहाने वाले कांवड़ियों का खतरे के निशान से आगे जाना मतलब खुद की जान जोखिम में डालना होगा। बैरीकेडिंग के अलावा गंगाघाट पर गोताखोर मुस्तैद रहेंगे, जो नहाने वाले कांवड़ियों पर नजर रखेंगे।
गुरुवार को कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए कछला गंगाघाट पर पूरे दिन बैरीकेडिंग का काम चला। जिला पंचायत कर्मियों की देखरेख में मजदूरों ने गोताखोरों की मदद से गहरों वाले स्थानों को चिह्नित कर बल्ले गाड़ दिए। देर शाम को बल्लियों पर लाल झंडियां भी लगा दी गईं। अफसरों ने गोताखोरों के लिए भी कांवड़ियों पर गहरे में जाने से रोकने की जिम्मेदारी सौंप दी है। वह अपनी-अपनी नावों पर रहकर निगरानी भी करेंगे। कांवड़ियों के वाहनों के लिए अस्थायी पार्किंग स्थल पुलिस चौकी और कॉलेज के पास दो स्थानों पर बनेगा। इसकी क्षमता करीब दो हजार वाहनों की होगी।
कछला गंगाघाट पर नगर पंचायत प्रशासन की ओर से सफाई का काम सुबह से ही शुरू कर दिया। बारिश की वजह से सफाई शुरू में प्रभावित भी हुई लेकिन अपराह्न में फिर से सफाई कर्मियों को काम पर लगा दिया गया। जिला पंचायत की ओर से गंगा में गहराई वाले स्थानों पर बल्लियां गाड़ दी गईं। गंगा किनारे के चारों घाट के गहराई वाले स्थानों को गोताखोरों की मदद से चिह्नित किया गया। नाविकों ने जिला पंचायत कर्मियों का सहयोग किया। बल्लियों पर लाल झंड्डियां लगाने का भी काम देर शाम शुरू किया गया। प्रशासन ने दो दर्जन नावों अधिग्रहित कर ली हैं। प्रत्येक नाव-नाविक के अलावा दो-दो गोताखोर भी रहेंगे। शुक्रवार को लाइटिंग की व्यवस्था को भी अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
पुलिस की व्यवस्थाओं में चौकी इंचार्ज अश्वनी कुमार ने बताया कि गंगाघाट के पास ही बरेली-मथुरा हाईवे से सटे खाली दो मैदानों को पार्किंग स्थल का चयन किया गया है। पार्किंग स्थल पर कांवड़ियों के वाहनों के अलावा निजी वाहन भी खड़े होंगे। दोनों अस्थायी पार्किंग स्थल की क्षमता करीब दो हजार वाहनों की होगी। पुलिस कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा। पुलिस कर्मियों की देखरेख में चार घाट पर वॉच टावर भी बनाने शुरू कर दिए गए हैं। प्रत्येक टावर पर एक-एक पुलिस कर्मी तैनात होगा।