दायूं। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब पर यहीं के डॉक्टरों को भरोसा नहीं है। क्योंकि वहां के डॉक्टर जिला अस्पताल की पैथोलॉजी रिपोर्ट मानते ही नहीं हैं। इससे मरीजों को निजी खर्चे पर बाहर निजी पैथोलॉजी से टेस्ट कराने पड़ते हैं। जिला अस्पताल में बुधवार को मरीजों से बातचीत की तो डॉक्टरों की हकीकत का पता चल सका। सरकारी अस्पताल में ककराला से भाई का इलाज कराने पहुंचे रामदास ने बताया कि अस्पताल में उन्होंने भाई के कई ब्लड टेस्ट कराए थे, जब वह टेस्ट रिपोर्ट लेकर डॉक्टर को दिखाने पहुंचे तो उन्होंने टेस्ट रिपोर्ट खारिज कर दी और कहा कि शहर के एक निजी क्लीनिक से टेस्ट कराओ यह रिपोर्ट गलत है। इसी तरह जिला महिला अस्पताल में भी महिला डॉक्टर भी अस्पताल की टेस्ट रिपोर्ट मानने से इंकार कर निजी लैब से टेस्ट कराने पर जोर दे रही हैं। जांच रिपोर्ट में कमीशन का खेल सरकारी अस्पताल के डॉक्टर कमीशन के चक्कर में मरीजों से बाहर की निजी लैब से टेस्ट करवाने पर जोर देते हैं। सूत्रों के मुताबिक डॉक्टरों ने शहर में संचालित कई निजी लैब से सांठगांठ की है। इनकी पर्ची पर जितने भी मरीज उनके बताई गई लैब में जाकर टेस्ट कराते हैं उस हिसाब से इन डॉक्टरों के पास कमीशन पहुंचता है। आलम यह है कि सरकारी डॉक्टर मरीजों से निजी लैब से टेस्ट कराने की बात कहते हुए बेहतर इलाज की बात करते हैं। सरकारी डॉक्टरों के इस कमीशन के खेल में मरीजों की जेब ढीली हो रही है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
दवाई बाहर से मंगाने की शिकायत मिली थी, जिसके बाद डॉक्टरों को चेतावनी दी गई। जांच अगर प्राइवेट लैब से कराने की बात की जा रही है तो ऐसा गलत है। शिकायत मिलने पर डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डॉ. आरएस यादव, सीएमएस