बदायूं। सरकार की ओर से बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने के लिए डाकघर में रजिस्ट्रेशन काउंटर खोला गया। इसमें बेरोजगारों का ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज किया जाना था। जिसके बाद डाकघर में रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या का लेखाजोखा सीधा लखनऊ में दर्ज होता, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण यह काम बीच में ही रुक गया।
अब तक हर जिले में केवल जिला सेवायोजन कार्यालय में ही बेरोजगारों युवाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाता था। जिसका सारा लेखाजोखा केवल जिले तक ही सीमित रह जाता था। जब कभी भी जिले में नौकरी निकलती थी तो विभाग की ओर से पंजीकृत अभ्यर्थियों को बुलाया जाता था। अधिकतर पंजीकृत बेरोजगारों के पास में इसकी जानकारी नहीं पहुंच पाती थी। इसको ध्यान में रखते हुए शासन ने प्रधान डाकघर में बेरोजगारों का पंजीकरण करने की योजना शुरू की। योजना शुरू तो हुई, लेकिन तकनीकी कमी और प्रचार प्रसार के अभाव के चलते योजना ज्यादा दिन चल नहीं पाई। अप्रैल में शुरू हुई योजना में अब तक प्रधान डाकघर में सिर्फ 19 ही बेरोजगारों ने पंजीकरण कराया है। जबकि सेवायोजना कार्यालय में लगभग 12 हजार बेरोजगारों ने पंजीकरण कराया है। इसके पंजीकरण की फीस 15 रुपये सरकार की ओर से निर्धारित की गई है। यह रजिस्ट्रेशन तीन साल के लिए वैध होगा।
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बेरोजगारों के रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। फिलहाल अभी लोगों में जानकारी का अभाव है। इस वजह से काफी कम संख्या में लोग पहुंचे हैं। साथ ही वेबसाइट में कुछ तकनीकी कमी आ रही है। उसके बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
- डीपी शर्मा, कार्यवाहक पोस्टमास्टर