उझानी (बदायूं)। इस बार हरियाणवी संस्कृति से सराबोर भोले के भजनों ने शिवभक्तों को रिझा दिया है। कांवड़ियों को थिरकने के लिए मजबूर करने वाले हरियाणवी संस्कृति के भजन धूम मचा दी है। कांवड़ यात्रा के दौरान गूंज रहे इन भजनों की लोकप्रियता की वजह हालांकि कोई खास नहीं है लेकिन तेज धुन सभी को भा रही है।
जेल करा देगी रे छोरी जेल करा देगी की तर्ज पर धूम मचावेगी रे गौरा धूम मचावेगी और मेरी गौरा कर दे कुछ हिल्ला, मेरा हो गया नशा फिर ढिल्ला, क्यों रूसी-रूसी बैठी गौरा, भांग बणां दे घोटा रे जैसे कई और ऐसे हरियाणीवी भजन हैं जो कांवड़ियों को थिरकने के लिए मजबूर कर रहे हैं। हालांकि हे भोले शंकर पधारौ, जय भोले जय भंडारी और पीके शंकर जी की बूटी, अंखियां खुल गई निदिया टूटी आदि भजन युवाओं की टोलियों को थिरकने पर मजबूर कर रहे हैं।
डीजे साउंड सिस्टम के संचालकों में अनीस की माने तो जो भी टोली साउंड सिस्टम बुक करने के लिए आती है, वह हरियाणवी कल्चर के भजनों को तरजीह देती है।