बदायूं। विवाहित अंगूरा देवी की हत्या के मामले में चार ससुरालियों को उम्रकैद की सजा के बाद मुगर्रा महानगर गांव में आरोपियों के घर के आसपास गुरुवार को भी सन्नाटा था। लोगों के जेहन में नौ साल पुरानी घटना ताजा हो गई, जब अंगूरा की मौत के बाद दोनों पक्षों में जबर्दस्त तनातनी हो गई थी। रिश्तेदारों से दबाव डलवाने के अलावा धनबल से समझौता करने की कई कोशिशें बेकार गईं, अंगूरा के परिवार ने दोषियों को सजा दिलाकर ही दम लिया।
थाना मूसाझाग क्षेत्र के गांव बीबीपुर निवासी संपन्न किसान भानुप्रताप सिंह ने अपनी बेटी अंगूरा देवी की शादी खुद से ज्यादा धनी रामप्रकाश यादव के बेटे से वर्ष 2006 में की थी। उन्होंने सोचा था कि बेटी को ससुराल में काफी सुख मिलेगा। रामप्रकाश के पास खुद की काफी जमीन होने के साथ ही मेंथा प्लांट भी था। चार बेटों में सबसे छोटे बेटे की शादी में रामप्रकाश ने भी दिल खोलकर खर्च किया। अंगूरा के साथ ही उसका पति भी नाबालिग था। कम उम्र की शादी के साइड इफेक्ट इस तरह सामने आए कि दंपति के जीवन में अक्सर झगड़े होने लगे। फिर 24 जनवरी 2008 का वह मनहूस दिन भी आया, जब अंगूरा का शव उसी के आंगन में पड़ा मिला। ससुरालवाले दंपति में आपसी मतभेद के बाद अंगूरा के खुद जान देने की बात कह रहे थे तो भानुप्रताप ने आरोप लगाया कि पचास हजार रुपये और बाइक न देने की वजह से अंगूरा की गला दबाकर हत्या कर दी गई। उन्होंने इसी आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई।
रिपोर्ट हुई तो रामप्रकाश ने कार्रवाई से बचने के लिए हर जतन किया। रिश्तेदारों से दबाव डलवाने के साथ ही यह भी पेशकश की कि लड़की पक्ष चाहे तो वह कितनी भी रकम दे सकते हैं। हालांकि भानुप्रताप ने दो टूक कह दिया कि उनकी बेटी की हत्या की गई है और आरोपियों को बिना सजा दिलाए चुप नहीं बैठेंगे। इस कार्रवाई से जहां पीड़ित पक्ष के दिल में तसल्ली है, वहीं आरोपी पक्ष को जोर का झटका लगा है। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय की न्यायाधीश सोनिका चौधरी ने दहेज हत्या के मामले में मृतका के सास-ससुर और जेठ-जेठानी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं, घटना के वक्त नाबालिग रहे अंगूरा के पति के मामले को किशोर न्याय बोर्ड में लंबित होने की वजह से इस अदालत की कार्रवाई से बाहर रखा गया है। बताते हैं कि आरोपी अब करीब 26 साल का है और उघैती के एक निजी डॉक्टर की दुकान पर कंपाउंडर का काम करता है।