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सता बदली, कुर्सी गई तो निशाने पर आए आबिद रजा

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मै‌रिज हाॅल - फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। वक्त की हर शह गुलाम कहावत यहां हकीकत साबित हुई। समय कमजोर को कब ताकतवर और बलवान को कब निर्बल बना दे कुछ कहा नहीं जा सकता। सपा सरकार में प्रभावशाली विधायक और दर्जा राज्यमंत्री रहे आबिद रजा के मामले में तो ऐसा ही नजर आता है। सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ ही उनकी विधायकी और अब उनकी पत्नी फात्मा रजा की चेयरमैनी जाने के बाद विरोधी उन पर हावी हो गए हैं। सोत नदी पर अवैध कब्जे के मामले में लंबित कार्रवाई पर धमाकेदार एक्शन इसी कवायद का हिस्सा है।
सपा सरकार में सूबे के नगर विकास मंत्री आजम खान के बेहद करीबी रहे आबिद रजा का सरकार के दिनों में अलग ही रुतबा था। जिले भर के विधायकों में वह ज्यादा प्रभावशाली दिखाई देते थे। विधानसभा चुनाव के कुछ महीने पहले सोत नदी किनारे की जमीनों पर कब्जे का मामला गरमाया तो उनमें आबिद रजा के निर्माणाधीन मैरिज हॉल का नाम भी प्रमुखता से आया। तब फौरी तौर पर अफसरों ने मामला दबाने की कोशिश की। हालांकि कुछ वक्त बाद आचार संहिता लग गई तो अफसरों से सत्ता का दबाव कुछ कम हो गया। इस क्रम में कभी इस निर्माण को सही तो कभी गलत बताने का क्रम जारी रहा। यहां तक कि सीडीओ ने इस निर्माण को सही बताकर कमिश्नर के यहां अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में बनाई गई टीम ने अपने पास उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे अवैध माना है। हैरत की बात यह है कि जिले में निकाय चुनाव निपटने के ठीक दो दिन बाद 24 नवंबर को निर्माण गिराने का नोटिस जारी किया गया और इस बड़ी कार्रवाई को प्रशासन मीडिया से भी छिपाए रहा। अब चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद इसे राजनेताओं की ओर से सार्वजनिक किया गया है। ऐसे में लग रहा है कि चुनाव परिणाम कुछ और होने पर इसमें भी दिलचस्प बात यह है कि प्रशासन का कोई अधिकारी इस बारे में टिप्पणी करने को तैयार नहीं है। सिटी मजिस्ट्रेट अवकाश पर हैं और उनका मोबाइल कोई दूसरा रिसीव कर रहा है। एडीएम प्रशासन का फोन स्विच ऑफ आ रहा है और डीएम इस कार्रवाई की जानकारी न होने की बात कह रहे हैं।
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आबिद रजा पक्ष ने कर रखी है अपील
सीडीओ की रिपोर्ट में निर्माण वैध और सिटी मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट में अवैध होने की स्थिति जानकारी में आने के बाद आबिद रजा पक्ष ने डीएम के यहां अपील दायर कर दी है। इसमें तर्क दिया गया है कि कनिष्ठ अधिकारी आखिर किस आधार पर वरिष्ठ अधिकारी की रिपोर्ट को झुठला रहे हैं। इसमें सिटी मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट को खारिज करने की मांग की गई है।
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दो और मैरिज हॉल भी ध्वस्त होंगे
सोत नदी के पास अवैध कब्जा हटाने की कड़ी में सिटी मजिस्ट्रेट ने यह इकलौती कार्रवाई नहीं की है। बताते हैं कि यहां संचालित हो रहे दो और मैरिज हॉल को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है। हालांकि शहर विधायक ने इनका जिक्र नहीं किया। उन्होंने यह जरूर कहा कि सोत नदी समेत दूसरी नदियों पर जितने भी अवैध कब्जे होंगे, वह गिराए जाएंगे।
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केवल ट्रांसफर की सजा मिली लेखपालों को
सोत नदी पर दोनों तरफ काफी कब्जे किए गए हैं। इस मामले में जब आबिद रजा पर आरोप लगे तो शहर में ही कई साल से डटे दो लेखपालों का नाम चर्चा में आया। सपा सरकार में लेखपालों के कारनामों के साक्ष्य देने के बावजूद उन पर कार्रवाई न हुई। बताया जाता था कि तहसीलदार और एसडीएम भी इन लेखपालों की मर्जी से ही काम करते थे। योगी सरकार आने के बाद जब इन लेखपालों की शिकायतें हुईं तो इन्हें दूसरी तहसीलों में ट्रांसफर कर दिया गया। पत्रकारों के सवाल पर शहर विधायक ने बताया कि दोषियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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