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सर्वे में 20 फर्जी रोडवेज बसें चिह्नित

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bus - फोटो : अमर उजाला
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सर्वे में 20 फर्जी रोडवेज बसें चिह्नित
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बदायूं। डिपो बस स्टैंड के गेट से बरेली तक संचालित होने वाली नकली रोडवेज बसों पर पुलिस या परिवहन विभाग ने तो कार्रवाई नहीं की पर डिपो प्रशासन इसे लेकर वाकई गंभीर है। एआरएम राजेश कुमार ने सर्वे कराकर बीस नकली रोडवेज की सूची तैयार करा ली है। इसे लेकर वह डीएम से मिलेंगे और फर्जीवाड़े को बंद कराने की मांग करेंगे।
बदायूं डिपो के गेट से इन बसों का संचालन किया जा रहा है। कुछ बसों का कलर रोडवेज जैसा हरा और कुछ का एक्सप्रेस सेवाओं सरीखा सफेद है। इनमें से कुछ के ऊपर बड़े अक्षरों में उत्तर प्रदेश लिखकर लोगों को रोडवेज बसों का अहसास कराने की कोशिश की गई है तो टिकट पर भी उप्र शासन जैसी मोहर लगी है। बसें बरेली में चौपुला होकर बरेली कॉलेज तक जाती हैं और नगर निगम गेट से मुसाफिरों को भरकर लाती हैं। सूत्र बताते हैं कि परिवहन विभाग और पुलिस की कृपा से यह बसें संचालित हो रही हैं। अमर उजाला ने मंगलवार को खबर छापकर इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया। इस बीच मंगलवार को अवैध बसों का संचालन तो हुआ पर की संख्या कम रही। एआरएम राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने केंद्र प्रभारी से सर्वे कराया तो उन्होंने नंबर सहित बीस बसों की लिस्ट उन्हें सौंपी है। ऐसी कई बसें कासगंज तक भी संचालित होती हैं। बदायूं डिपो को ही बरेली-कासगंज रूट पर एक लाख रुपये रोज के राजस्व का घाटा हो रहा है। अन्य डिपो की बसों का जोड़ें तो कम से कम दो लाख का घाटा प्रतिदिन है।
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एक किमी तक नहीं हो सकता संचालन
मुख्य सचिव के स्तर से इस संबंध में सभी जिलों के डीएम और एसएसपी को पूर्व में ही गाइड लाइन जारी की जा चुकी है। इसके मुताबिक रोडवेज बस स्टैंड के एक किमी के दायरे में किसी प्रकार की निजी बसों का संचालन नहीं किया जा सकता। अगर स्टैंड के आसपास संचालन हो रहा है तो अधिकारी संयुक्त टीम बनाकर कार्रवाई करें।
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भेदिये देते हैं सूचना, चेकिंग में नहीं मिलती बसें
कई बार अधिकारी संयुक्त चेकिंग करके ऐसी बसों को पकड़ने का प्लान बनाते हैं। सूत्र बताते हैं कि विभागों में मौजूद बस माफिया के भेदिये इसकी जानकारी पहले ही दे देते हैं और बसें मौके पर नहीं मिलतीं।
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जान जोखिम में नहीं मिलेगा मुआवजा
रोडवेज बस में सफर करने वाला हर मुसाफिर बीमित होता है। उसके साथ कोई हादसा हो जाने पर उसे या आश्रितों को बीमे की रकम मिलती है। वहीं, इस तरह की अवैध बसों में अगर कोई हादसा होता है तो उसका बीमा मिलने का कोई प्रावधान नहीं है।
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