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गंगा का जलस्तर बढ़ा, घाट बनाने का काम रोका

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पहुंचने लगे श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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कादरचौक (बदायूं)। मेला ककोड़ा नजदीक आने के साथ गंगा घाट पर तंबुओं का शहर बसने लगा है। श्रद्धालुओं का पहुंचना भी शुरू हो गया। शुक्रवार को गंगा के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो गई। इस कारण गंगा में श्रद्धालुओं के स्नान को बनाए जा रहे घाटों का काम रोक दिया गया। घाट बनाने का काम गंगा के रुख में परिवर्तन होने के अंदेशे के तहत रोका गया है।
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गंगा की तलहटी पर लगने वाले मिनी अर्धकुंभ मेले में रौनक लगातार बढ़ रही है। दूरदराज से पहुंचे दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजाना शुरू कर दी हैं। शाम होते ही मेला रोशनी से जगमग होने लगता है। गांवों के लोग कई दिनों तक मेले में रहते हैैं सो उन्होंने अपनी झोपड़ियां डालनी शुरू कर दी हैं। तमाम परिवार पहुंच भी गए हैं। डनलप और गाड़ियों से ग्रामीण इलाकों के लोग दिन-रात पहुंच रहे हैं।
मगर चिंता की बात यह है कि गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। दो दिन के अंदर लगभग एक फुट पानी बढ़ गया है और यह सिलसिला लगातार जारी है। मुख्य मल्लाह मुशाकिर ने बताया कि गंगा में पानी लगातार बढ़ ही रहा है। इधर, गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को फ्लड पीएसपी भी पहुंच गई है। जो गंगा घाट पर नजर रखती है। नाव भी पहुंच गई हैं। मुख्य मल्लाह मुशाकिर का कहना है कि गंगा के जलस्तर में वृद्धि से लोगों को यह आशंका है कि कहीं गंगा अपना रुख न बदल दे। इधर, गंगा किनारे श्रद्धालुओं को नहाने के लिए जिला पंचायत की ओर से बनवाए जा रहे घाट का काम रोक दिया गया है। कहा जा रहा है कि जलस्तर के स्थिर होने के बाद फिर से घाट बनाने का काम शुरू होगा।
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गंगा तट पर बसने लगी संत नगरी, कई स्थानों से पहुंचे साधु
कादरचौक (बदायूं)। मेला ककोड़ा में हर साल देश के विभिन्न राज्यों से साधू संत पहुंचते हैं। सो बीते दिन से संतों का पहुंचना भी शुरू हो गया है।
साधू-संत अपनी नगरी अलग ही बसाते हैं। वह भी मेले की समाप्ति तक रहते हैं। भारी संख्या में साधू-संतों के आने से माहौल और भी अच्छा हो जाता है। देवराहा बाबा के शिष्यों के साथ ही मधुसूदनाचार्या देवचरी वाले भी यहां पहुंच गए हैं। आर्य समाज और शांतिकुंज से जुड़े पदाधिकारियों-सदस्यों ने भी अपनी राऊटी लगा ली हैं।
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प्रतिबंध के बाद भी पॉलिथीन का हो रहा प्रयोग
कादरचौक (बदायूं)। मेला ककोड़ा में हर साल पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध रहता है,लेकिन अब तक मेले में पॉलिथीन और प्लास्टिक के गिलास का प्रयोग खूब हो रहा है। जिसकी वजह से गंदगी भी बढ़ रही हैं। इनके प्रयोग से श्रद्धालुओं में रोष भी है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि पॉलिथीन की थैलियों और प्लास्टिक के गिलासों पर रोक नहीं लगाई गई तो मेले में गंदगी की समस्या के साथ गंगा में प्रदूषण भी काफी बढ़ जाएगा। तब श्रद्धालुओं को और ज्यादा दिक्कत होगी। लिहाजा, इन पर तत्काल रोक लगाने को जिला प्रशासन को कदम उठाना चाहिए।
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राजनीतिक दलों के बनने लगे कैंप
कादरचौक। मेला ककोड़ा में राजनीतिक दलों के भी कैंप लगने लगे हैं। वहीं खैराती चौक की सड़क नहीं बनी हैं। जिसकी वजह से लोगों को दिक्कत हो रही है। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार ने मेले के अंदर पूर्व की तरह सफाई नहीं कराई है। खेतों को समतल नहीं किया गया है जिसकी वजह से लोगों को ठोकरें लग रहीं हैं। लोगों ने कहा कि यदि सड़कों को समतल नहीं किया गया तो मेले के अंदर आने वाले टेंपो पलट सकते हैं।
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