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साथ-साथ जलीं पिता-पुत्र की चिताएं

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दातागंज।
कुछ समय तक तोतीराम के घर में सब कुछ ठीक चल रहा था। शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि तोतीराम की अर्थी उसके जवान बेटे के साथ उठेगी, लेकिन नियति को शायद यहीं मंजूर था। तेज बुखार से बेटे की मौत के दो घंटे के बाद ही तोतीराम ने भी दम तोड़ दिया। पिता-पुत्र की अर्थी भी एक साथ निकली। सैकड़ों की संख्या में गम में डूबे लोगों के सामने उनकी चिता को एक साथ मुखाग्नि दी गई तो लोग आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
तहसील क्षेत्र के गांव बुझिया में मातम छाया हुआ है। लोगों के चेहरे बुझे हुए हैं। तोतीराम मजदूरी करके परिवार की नैया को पार लगा रहा था। करीब 45 वर्षीय तोतीराम को बुखार मौत बनकर आया। बुखार ने उसके जवान बेटे रामप्रकाश को भी गिरफ्त में लेकर उसे भी मौत के आगोश में ले लिया। पिता-पुत्र की मौत का अंतराल मात्र दो घंटे का रहा। इससे पहले अस्पताल में दोनों जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे थे। जब बेटे रामप्रकाश की मौत की खबर तोतीराम के कानों तक पहुंची तो वह खामोश हो गया। घर वाले रामप्रकाश के शव के पास बिलख रहे थे, देखा तो तोतीराम को भी मौत अपनी ओर खींच रही है और मात्र दो घंटे के बाद उसकी भी आंखें हमेशा-हमेशा को बंद हो गईं। पिता-पुत्र की मौत की खबर जब गांव बुझिया पहुंची तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। लोग उनके शव आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही दोनों के शव गांव पहुंचे तैसे ही हर तरफ से रोने-चिल्लाने की आवाज गूंजने लगी।
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इंसेट-
पत्नी और बाकी सदस्यों की भी हालत है खराब
दातागंज। तोताराम की 40 वर्षीय पत्नी गौरा, 11 साल का बेटा नन्हू, 14 वर्ष का बेटा नन्हें, 16 साल का श्रीपाल और सात साल की बेटी शतानु भी बुखार की चपेट में हैं। इनके भी पैरों में सूजन है। पति और जवान बेटे की मौत से गौरा होशोहवाश खो बैठी हैं। उन्हें देखने आने वाले लोग भी आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। सब का इलाज निजी डॉक्टर से चल रहा है।
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डॅाक्टरों को लेकर है लोगों में आक्रोश
दातागंज। ग्राम प्रधान बुझिया संजय शर्मा का कहना है कि जब तोतीराम और बेटे रामप्रकाश को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज को ले जाने को रेफर क्यों किया। बोले-डॉक्टरों ने यदि बेहतर इलाज दिया होता तो शायद पिता-पुत्र बच जाते। प्रधान ने कहा कि डॉक्टरों को लेकर गांव के लोगों में आक्रोश है।
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