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छात्रवृत्ति घोटाले में सामने आ सकता है बड़ा रैकेट

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बदायूं। ढाई करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की शुरूआत कहां से हुई, अभी इसका पता लग पाना मुश्किल है, लेकिन यह बात तय है कि समाज कल्याण विभाग और अन्य विभागों ने मिलीभगत से यह घोटाला किया था। इसमें एक और बात निकलकर सामने आ रही है कि जिन खातों में रुपये ट्रांसफर किए गए थे, उनमें अधिकतर खाते संदिग्ध हैं। उन्हें फर्जी तरीके से खोला गया है, जिसके लिए जिला सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधकों से सांठगांठ की गई थी।
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आसफपुर इलाके के कुछ ऐसे मदरसों के नाम प्रकाश में आए हैं, जो हकीकत में धरातल पर हैं ही नहीं। न तो उनके नाम के मदरसे हैं और न ही गांव वाले होना बता रहे हैं। इनमें एक मदरसा कोई दूसरा व्यक्ति चला रहा है। उसका दावा है कि वह मदरसा उसका है लेकिन सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक उसके मदरसे के बताए गए संचालक कोई और हैं। इन फर्जी संचालकों ने अपने-अपने खाते भी खुलवा लिए थे। अपने मदरसे बिसौली कोतवाली क्षेत्र के ग्राम संग्रामपुर और लक्ष्मीपुर में चलना बताए थे। अब हकीकत क्या है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल संग्रामपुर और लक्ष्मीपुर के अलावा आसपास के कई गांव में जोरों पर चर्चाएं चल रहीं हैं। कुछ मदरसों को गांव वालों ने फर्जी करार दिया है। कहा है कि घोटालेबाजों ने नर्सरी से लेकर जूनियर और हाईस्कूल तक कागजों में खोल रखे हैं।
फिलहाल जो भी हो, इस घोटाले में एक बड़े रैकेट का खुलासा होगा। समाज कल्याण विभाग, जिला अल्पसंख्यक एवं कल्याण विभाग, जिला प्रोबेशन विभाग एवं जिला दिव्यांगजन कल्याण विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, जिला सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक, स्कूल, मदरसा संचालकों की मिलीभगत साफ हो चुकी है।
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मदरसा-स्कूलों ने कई मदों से निकाले रुपये
-सिविल लाइंस थाने में दर्ज की गई एफआईआर में एक-एक विद्यालय और मदरसों ने कई बैंकों में अपने खाते खुलवाए थे। उन्होंने समाज कल्याण विभाग, जिला अल्पसंख्यक एवं कल्याण विभाग, जिला प्रोबेशन विभाग एवं जिला दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा अलग-अलग रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
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