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निकलने को जगह नहीं, जहां मर्जी बना दिए स्टैंड

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निकलने के लिए जगह नहीं, जहां मर्जी बना दिए स्टैंड
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बदायूं। शहर बदायूं की तस्वीर बिगाड़ने वाले एक नहीं तमाम कारण हैं। अतिक्रमण, बेतरतीब पार्किंग, नालों पर कब्जे आदि के साथ जगह-जगह बने अस्थायी वाहन स्टैंड भी कोढ़ में खाज जैसा काम कर रहे हैं। शहर की कई सड़कों और चौराहों पर ऐसे स्टैंड बना लिए गए हैं। पहले यहां एक-दो वाहन खड़े किए गए, फिर बाकायदा इन्हें स्टैंड का रूप दे दिया गया। अब हालत ये हैं कि शहर की कई मुख्य सड़कों पर ऐसे स्टैंड जनता के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक शहर की जनसंख्या लगभग डेढ़ लाख थी, लेकिन वर्तमान में आबादी लगभग दो गुना बढ़ गई है। शहर का विस्तार तो ज्यादा नहीं हुुआ, लेकिन आबादी घनी होती गई। पास के गांवों के लोगों ने अपने मकान यहां बना लिए या किराये पर आकर रहने लगे। वर्तमान में शहर की जनसंख्या 2011 की तुलना में लगभग दो गुनी हो गई है। जैसै-जैसे आबादी बढ़ी वैसे-वैसे लोगों को रोजगार की आवश्यकता होने लगी। ऐसे में शहर में डग्गामारी, टैंपो, ई-रिक्शा की तो मानों बाढ़ ही आ गई। जब इनकी संख्या बढ़ी तो इन्हें खड़ा करने के लिए जगह की समस्या हुई। इसके लिए चालकों ने जगह जगह वाहन खड़े करना शुरू कर दिए। एक-दो से होती हुई यह संख्या हजारों में जा पहुंची। वर्तमान में वाटर वर्क्स रोड पर टैक्सी स्टैंड, पनवड़िया के पास और आंबेडकर तिराहे के नजदीक टैंपों स्टैंड, पुरानी चुंगी पर तांगा स्टैंड लोगों की समस्या बन गए हैं। पुलिस, प्रशासन तथा नगर पालिका की अनदेखी के चलते इन वाहनों के लिए अब तक कोई स्थायी स्टैंड की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
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सीन एक
लावेला चौक से सकरी क्लीनिक होते हुए शिव मंदिर को जाने वाले रोड पर टाटा मैजिक वालों का कब्जा है। यहां सड़क के दोनों ओर टाटा मैजिक, मेटाडोर आदि खड़े रहते हैं। वैसे यह रोड अच्छी खासी चौड़ी है लेकिन दोनों ओर वाहन खड़े होने के कारण यह संकरी गली सी दिखाई देती है। शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब इस रोड पर जाम न लगता हो। रविवार वाले दिन यहां अस्थायी दुकानें भी सज जाती है, तो स्थिति और भी ज्यादा विकराल हो जाती है।
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सीन दो
पनवड़िया चौराहे से सुभाष चौक जाने वाले मार्ग पर ऑटो वालों का कब्जा है। यहां से निकटवर्ती गांव लखनपुर, आमगांव, गुलड़िया आदि स्थानों पर जाने के लिए टेंपो खड़े रहते हैं जो आने जाने वालों के लिए समस्या पैदा करते हैं। इन टेंपो के कारण यहां आए दिन जाम जैसी स्थिति रहती है।
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सीन तीन
जिला अस्पताल से लावेला चौक जाने वाले रास्ते पर आंबेडकर तिराहे पर भी बड़े ऑटो वालो का कब्जा है। यहां मोटर मिस्त्रियों की दुकानें हैं, जिसके कारण यहां वैसे भी भीड़ रहती है, उस पर यहां टेंपो खड़े होकर सवारियां भरते हैं। इसके अलावा पुरानी चुंगी पर अस्थायी तांगा स्टैंड बना है। यहां से तांगे वाले बरेली तथा चंदौसी रोड पर पड़ने वाले गांवों के लिए सवारियां भरते हैं। मुुरादाबाद-फर्रुखाबाद रोड होने के कारण यहां हालत और ज्यादा खराब रहती है।
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सीन चार
वाटर वर्क्स रोड पर हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां वर्षों से टैक्सी वालों का कब्जा है, जो आये दिन के झगड़े और जाम का कारण बनते हैं। इस रोड के निकट ही रोडवेज बस स्टैंड है। सबसे ज्यादा डग्गामारी भी इस चौराहे से होती है। रोजाना यहां कई बार जाम के हालात पैदा होते हैं। कई बार पुलिस और प्रशासन ने इस स्टैंड पर खड़े होने वाले टैक्सी चालकों को खदेड़ा, लेकिन कुछ दिनों बाद वही हालात हो गए।
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नगर पालिका के पास स्थायी स्टैंड बनाये जाने के लिए फिलहाल कोई जगह नहीं है। नगर पालिकाध्यक्ष से बात करके इसके संबंध मे प्रभावी कदम उठाये जाएंगे। जगह तलाश करने की भी कोशिश की जाएगी ताकि शहर के अंदर से अस्थायी स्टैंड हटाये जा सकें।
-संजय तिवारी, ईओ नगर पालिका
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