सिंचाई में नहीं होगी पानी की बर्बादी
बदायूं। भूजल के अंधाधुंध दोहन से डार्क जोन में शामिल हुए ब्लॉकों में अब स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई की जाएगी। इस विधि से अब डार्क जोन क्षेत्र के किसान आसानी से भूगर्भीय जल को संरक्षित रखकर अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। इसके लिए सरकार किसानों को अनुदान भी देगी। सरकार की इस पहल से डार्क जोन में सिंचाई की दिक्कत से राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार किसानों को स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई करने के लिए प्रेरित कर रही है। डार्क जोन में शामिल अंबियापुर, इस्लामनगर, कादरचौक, सहसवान, उझानी, आसफपुर और बिसौली में यह विधि कारगर साबित होगी। प्रभावित ब्लॉकों के किसानों को सरकार की ओर से अनुदानित स्प्रिंकलर सेट दिए जाएंगे। इसके लिए किसानों को चिह्नित किया जाएगा। एक किसान को 16-16 मीटर के छह एचडी पाइप दिए जाएंगे। इसमें सामान्य किसानों को 80 फीसदी और लघु सीमांत किसानों को 90 फीसदी का अनुदान सरकार की ओर से दिया जाएगा। किसान इस विधि से अपनी फसल की सिंचाई कर सकेंगे। इसमें पानी की बेहद कम खपत होगी।
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इस विधि से होती है पानी की बचत
स्प्रिंकलर या बौछार सिंचाई विधि बारिश की तरह ही कारगर होती है। इससे 70 से 80 फीसदी पानी की बचत हो जाती है। डार्क जोन में सिंचाई के लिए यह विधि सबसे कारगर है। इससे नोजल के जरिए फव्वारे के रूप में फसलों की सिंचाई की जाती है। इस सिंचाई के लिए कृषि भूमि के समतल रहने की भी आवश्यकता नहीं है।
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समय की होगी बचत
वर्तमान में नलकूप से फसल तक कच्ची नालियों के जरिए पानी पहुंचाया जाता है। ऐसे में किसानों का काफी समय बर्बाद होता है। स्प्रिंकलर विधि से सीधे पानी फसल को मिलेगा। ऐसे में किसानों को समय की भी बचत होगी।
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इस विधि से किसानों को काफी फायदा होगा। शासन की ओर से अभी इस पर छूट दी जा रही है। इसमेें पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर योजना का लाभ किसानों को दिया जाएगा।
-रामवीर कटारा, उप कृषि निदेशक