नगर और क्षेत्र में चल रही बिजली की अघोषित कटौती से सभी परेशान हो गए हैं। कटौती का कोई समय निर्धारित नहीं है। लोगों में बेहद नाराजगी है। कटौती की वजह से कई ऐसे लोगों को पीने के पानी की भी दिक्कत हो रही है जो कि पालिका की जलापूर्ति पर ही आश्रित हैं। ऐसे लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। कटौती के बारे में जब भी उपकेंद्र पर तैनात कर्मचारियों से पूछा जाता है तो एक ही रटारटाया जवाब दिया जाता है कि बड़ी लाइन में खराबी आ गई है। कितनी देर में सप्लाई सुचारू होगी यह कोई नहीं बताता।
कहने को नगरों को 16 घंटे सप्लाई के आदेश हैं। मगर दातागंज नगर और क्षेत्र में ऐसा नहीं हो रहा है। बिजली के आने जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। गुरुवार की सुबह गई सप्लाई शाम करीब पौने छह बजे सुचारू हुई। चूंकि गर्मी भी उमस भरी पड़ रही है ऐसे में लोगों को बिजली न होने पर और भी ज्यादा दिक्कत हो रही है। बिजली नहीं होने के बारे में जब विभागीय कर्मचारियों से पूछा गया तो बताया गया कि बड़ी लाइन में खराबी आ गई है। उसे दुरुस्त किया जा रहा है। ऐसा सप्ताह में कई बार हो चुका है। पूरे दिन बिजली के गायब रहने से सामान्य जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है। सुबह लोगों को नगर पालिका की जलापूर्ति भी नसीब नहीं हो पाती है। तब उन लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर जाना पड़ता है।
इस बारे में अधिशासी अभियंता से बात की गई तो बोले लाइन लंबी है, हो सकता है कि कहीं पर खराबी आ गई हो। जब उनसे पूछा गया कि इस तरह की समस्या सप्ताह में कई बार आई है तब उन्होंने कुछ नहीं कहा। खैर, बिजली कटौती से हर कोई परेशान हैं। सो क्षेत्रीय विधायक राजीव कुमार सिंह को भी लोगों ने इस समस्या को दूर कराने की मांग की है। विधायक ने कहा है कि वह आला अफसरों से बात करेंगे। यदि स्थानीय स्तर पर किसी तरह की कटौती की जाती है तो उसे सहन नहीं किया जाएगा। जनता को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
ट्रिपिंग की भेंट चढ़ गई नौ घंटे की बिजली सप्लाई
पिछले दिनों बरसात के बाद उपभोक्ताओं को उम्मीद जागी कि लो-वोल्टेज की समस्या से निजात के साथ सप्लाई भी शेड्यूल के अनुरूप मिलेगी लेकिन तीन-चार दिन से कटौती समेत ट्रिपिंग की समस्या ने उपभोक्ताओं को परेशानी में डाल दिया। बुधवार रात से लेकर गुरुवार शाम तक सप्लाई 10-12 घंटे ही नसीब हो पाई। ज्यादातर सप्लाई ट्रिपिंग और ओवरलोडिंग की भेंट चढ़ गई।
ओवरलोडिंग तभी होती है जब उत्पादन के हिसाब से खपत ज्यादा हो। यह बात अफसर भी जानते हैं। स्थानीय उपकेंद्र पर मशीनों में फॉल्ट भी आम बात हो गए हैं। हालांकि स्थानीय बिजली अफसर टेक्निकल प्रॉब्लम बताकर उसे हर बार ही ठीक करते रहने का दावा करते रहे हैं लेकिन प्रॉब्लम क्यों आई, इसका जवाब नहीं देते। चार दिन पहले करीब 20 घंटे तक ब्लैक आउट रहा। सप्लाई तो मिली लेकिन सुधार नहीं हो पाया। बुधवार रात में और गुरुवार दिन में भी उपभोक्ताओं को ट्रिपिंग का सामना करना पड़ा। गुरुवार को तो पांच घंटे में ही 11 बार ट्रिपिंग की समस्या सामने आई।
गुरुवार को उपकेंद्र पर मशीनें दुरुस्त करने के लिए बदायूं के इंजीनियर भी पहुंचे। इंजीनियर भी बार-बार फॉल्ट होने की वजह तक नहीं पहुंच पाए हैं। ग्रामीण इलाकों में दिक्कत इससे भी ज्यादा है। ग्रामीणों में सराय स्वाले के हरीओम और हरहरपुर निवासी प्रेमपाल ने बताया कि मैंथा और मक्का की फसल की सिंचाई के दिनों में कटौती ने खेल खराब कर दिया है। गांवों को लगातार पांच घंटे तक सप्लाई नहीं मिल पा रही है। पिछले दिनों किसानों ने उपकेंद्र पर आकर मक्के के सूखे पौधे भी अफसरों को दिखाए थे लेकिन सप्लाई की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर ऐसा ही माहौल रहा तो फसलों का उत्पादन भी गिरेगा।