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ब्लेडयुक्त तार लगाने पर होगी खेत मालिकों पर कार्रवाई

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ब्लेडयुक्त तार लगाने पर होगी खेत मालिकों पर कार्रवाई
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भाकियू नेता की शिकायत पर सीवीओ ने एसएसपी को लिखी चिट्ठी
ब्लेड वाले तारों की चपेट में आने से होती रही घुमंतू पशुओं की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
घुमंतू जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे ब्लेडयुक्त तार के मामले में प्रशासन हरकत में आ ही गया। फसल को जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए जो किसान अब ब्लेडयुक्त तार की बाड़ लगाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। दर्जनों की संख्या में धुमंतू जानवर इसके चपेट में आकर मौत का शिकार हो चुके हैं। भाकियू नेता सत्यवीर सिंह की शिकायत पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. एके जादौन ने एसएसपी को चिट्ठी लिखकर ऐसे खेत मालिकों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध भी किया गया है।
ब्लेडयुक्त तार से लहूलुहान होकर मौत के मुंह में समाने वाले घुमंतू जानवरों में सर्वाधिक संख्या कादरचौक, दातागंज, उसहैत और सहसवान क्षेत्र में रही है। जानवरों से फसल को बचाने के लिए ज्यादातर स्थानों पर ग्रामीण खेतों के चारों ओर तार कस देते हैं। पिछले तीन-चार साल से ब्लेडयुक्त तार चलन में आए तो किसानों ने जानवरों की जिंदगी की परवाह किए बगैर ऐसे तारों की बाड़ लगानी शुरू कर दी थी। ऐसा भी नहीं कि घुमंतू जानवरों की मौत की संख्या में इजाफा को लेकर मामले प्रशासन के संज्ञान में नहीं आए हों, लेकिन पशु प्रेमियों की शिकायत के बाद भी अफसरों ने हकीकत पर गौर करने की जरूरत महसूस नहीं की।
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यह मामला पिछले महीने भारतीय किसान यूनियन के नेता कादरचौक में गांव बमनौसी निवासी सत्यवीर सिंह ने अफसरों के सामने उठाया। बाद में उन्होंने पूर्व के मामलों का उल्लेख करते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन को पत्र भी सौंप दिया। बकौल सत्यवीर, चार दिन पहले उन्होंने सीवीओ से बात भी की। सीवीओ इसके जवाब में स्पष्ट कर दिया है कि ब्लेडयुक्त तारों की बाड़ घुमंतू जानवरों के लिए घातक साबित हो रही है। सीवीओ ने कार्रवाई के लिए एसएसपी को भी चिट्ठी भेजी है। अब, ब्लेडयुक्त तारों का जहां भी मामला सामने आएगा, उस खेत के मालिक का पता लगाकर संबंधित थाने की पुलिस कार्रवाई करेगी।
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इंसेट
घायल घुमंतू जानवरों का इलाज असंभव
उझानी। ब्लेडयुक्त तार की धार काफी तेज होती है। जानवर पेट भरने के लिए फसल की ओर बढ़ते हैं तो तार की चपेट में आकर लहूलुहान हो जाते हैं। उसके घाव भी गहरे होते हैं। चूंकि घायल जानवरों की ओर कोई गौर नहीं करता और न ही उनके इलाज की जरूरत महसूस की जाती। घायल जानवरों में सेफ्टिक भी हो जाता है। बाद में उनकी मौत हो जाती है।
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