सप्ताह भर में दो-तीन बार आंधी और बूंदाबांदी से राहत मिलते ही एक दिन पहले आसमान साफ हुआ तो किसानों ने सारे कामकाज छोड़ खेतों की ओर रुख कर लिया। शनिवार को पूरे दिन कटाई चली। जो गेहूं कटे पड़े थे, उनकी थ्रेसिंग ने भी रफ्तार पकड़ ली।
इलाके में कई स्थानों पर शनिवार को गेहूं की कटाई ने जोर पकड़ लिया है। पिछेती गेहूं की फसल पक कर तैयार होने में अभी 10-15 दिन लगेंगे लेकिन खेतों में पकी खड़ी फसल को लेकर किसान किसी तरह का जोखिम भी मोल लेना नहीं चाहते। सारे कामकाज छोड़कर किसानों ने कटाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। गेहूं की कटाई शुरू भी हुई लेकिन नमी की वजह से किसानों को परेेशानी का सामना करना पड़ा। पटपरागंज के हरीओम ने बताया कि चार-छह दिन मौसम इसी तरह से साफ रहा तो 50 फीसदी से ज्यादा फसल की कटाई का काम पूरा हो जाएगा। इसके विपरीत बूंदाबांदी से पहले खेत में कटे पड़े गेहूं की पूलियां भी सूख गई हैं। उनकी थ्रेसिंग ने भी रफ्तार पकड़ ली। दिन में तेज हवा की वजह से थ्रेसिंग पर दो-तीन घंटे को ब्रेक जरूर लगा लेकिन दिन ढलते ही खेतों में थ्रेसर चलने लग गए। सबसे अच्छी बात तो यह कि किसान थ्रेसिंग के बाद भूसा उठाकर ले जाने में देर नहीं कर रहे हैं।
कटाई के रेट में 200 रुपया प्रति बीघा का इजाफा
उझानी। पिछले दिनों मौसम का मिजाज बिगड़ा तो गेहूं उत्पादकों की परेशानी का फायदा उठाने में मजदूर भी नहीं चूके। गेहूं की कटाई को वरीयता दे रहे मजूदरों ने टोलियां बना ली है। पहले गेहूं की कटाई का रेट प्रति बीघा सात रुपया तक चला था। इस बार मजदूरों ने दो रुपया प्रति बीघा इजाफा कर नौ रुपया लेने शुरू कर दिए हैं।