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सड़कों पर बेहिसाब वाहन, फैल रहा प्रदूषण

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फोटो- 12, 13 व 14
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वह दिन दूर नहीं जब बदायूं वाले भी घर से मास्क लगाकर निकलेंगे
सड़कों पर बेहिसाब वाहन, फैल रहा प्रदूषण
हर महीने जिले की सड़कों पर बढ़ रहे करीब दो हजार वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। पर्यावरण को लेकर जबर्दस्त बेअंदाजी कोई गुल खिलाएगी। मौजूदा हाल देखकर लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली की तरह बदायूं वाले भी मुंह पर मास्क लगाकर घर से बाहर निकलेंगे। पर्यावरण प्रदूषण के प्रति रत्ती भर सजगता न होने से समस्या बढ़ती जा रही है। वाहनों की ही बात करें तो जिले में सड़कों पर हर साल करीब दो हजार वाहन बढ़ जाते हैं। इससे ध्वनि व वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
परिवहन कार्यालय में उपलब्ध आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में हर माह औसतन 1500 बाइक, 180 स्कूटी, 120 कार और करीब 130 भारी व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। जाहिर है कि जिले में रहने वाले कई लोग दूसरे जिलों से भी वाहनों को खरीद लाते हैं। इस लिहाज से कुछ और भी वाहन हर माह जिले की सड़कों पर बढ़ रहे हैं। हर माह करीब दो हजार से ज्यादा वाहन जिले की सड़कों पर बढ़ रहे हैं। इनमें से करीब चालीस फीसदी वाहन शहर में तो बाकी जिले के ग्रामीण इलाकों में दौड़ रहे हैं। इनके अलावा पहले से पंजीकृत वाहन भी सड़कों पर दौड़ते हैं। नए वाहनों के मुकाबले पुराने वाहन प्रदूषण फैलने के ज्यादा जिम्मेदार हैं। क्योंकि इनमें से अधिकतर बीएस थ्री श्रेणी के वाहन हैं जो ज्यादा कार्बन और सल्फर उत्सर्जित करते हैं।
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बीएस- थ्री वाहनों का हो रहा रजिस्ट्रेशन
बदायूं। प्रदूषण मानकों के विपरीत अब तक जिले में बीएस थ्री श्रेणी के वाहनों का भी रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। यूं तो एक अप्रैल से इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद होकर केवल बीएस फोर श्रेणी के वाहन ही पंजीकृत होने थे। बावजूद हर जिले में साफ्टवेयर लोड न होने से अभी भी ऐसे वाहनों का पंजीकरण हो रहा है।
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11 तक करा लें रजिस्ट्रेशन
59 जिलों में बीएस थ्री वाहनों का पंजीकरण बंद हो चुका है। बदायूं जिले में भी यह जल्द ही बंद होने वाला है। इस सिलसिले में लखनऊ में बैठक हुई थी। अब 11 फरवरी तक रजिस्ट्रेशन हो सकता है। ऐसे सभी वाहन, ई रिक्शा आदि के स्वामी जल्दी ही पंजीकरण करा लें। वर्ना बाद में यह वाहन रजिस्टर्ड नहीं हो सकेंगे।
- एनसी शर्मा, एआरटीओ प्रशासन
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बिना जांच दे देते हैं एनओसी
बदायूं। वाहनों को पर्यावरण अनापत्ति प्रमाणपत्र देने के लिए शहर में दो केंद्र संचालित हैं। यहां दोपहिया वाहनों को पचास रुपये देकर तो चार पहिया वाहनों को सौ रुपये में अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया जाता है। नियमानुसार प्रमाणपत्र देने में कई मानकों की जांच होनी चाहिए पर इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार तो बिना वाहन देखे प्रमाणपत्र दे दिया जाता है।
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वाहन पंजीकरण- फैक्ट फाइल
बाइक- 175184
स्कूटी- 14000
कार, जीप- 11000
भारी वाहन- 9000
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प्रदूषण की भयावहता पर क्या कहते हैं लोग
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शहर से तो गांव का माहौल अच्छा है। मैं रोज शहर में कामकाज के सिलसिले में आता हूं। यहां काफी प्रदूषण है। कोई इस बारे में सोचता भी नहीं।
- कृष्णगोपाल दीक्षित, उनौला

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रोडवेज बस स्टैंड के आसपास काफी प्रदूषण रहता है। दिन भर गाड़ियों के प्रेशर हार्न और धुएं से दुकानदारों और राहगीरों की मुसीबत बनी रहती है।
- गुड्डू, पुस्तक विक्रेता

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प्रदूषण की भयावहता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस बारे में सबको मिलकर प्रयास करना होगा। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है।
- डॉ. नीरज कौशिक, रिटायर्ड प्रवक्ता

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वाहनों का प्रदूषण बड़ी समस्या है। इससे सभी को परेशानी होती है। लोगों ने साइकिल चलाना तो लगभग छोड़ ही दिया है। इससे शा रीरिक समस्याएं भी हो रही हैं।
- ओमप्रकाश गुप्ता, व्यवसायी

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प्रदूषण के कारण दिन के वक्त घर से निकलना मुश्किल हो गया है। इस वक्त काला धुआं छोड़ने वाले सैकड़ों वाहन सड़क पर होते हैं।
- सोनल अग्रवाल, गृहणी

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हम तो छात्राओं के लिए भी यही शिक्षा देते हैं कि पर्यावरण संतुलन के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं। इसके अलावा लोगों को प्रदूषण से होने वाले खतरों के प्रति जागरूक करें।
- वंदना मिश्रा, प्रोफेसर राजकीय कन्या महाविद्यालय
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