चाचा की हत्या के जुर्म में दो सगे भाइयों समेत चार को उम्रकैद
मृतक के बड़े भाई और भाभी को किया बरी
साढ़े तीन साल पहले वजीरगंज इलाके में हुई थी घटना
एक मुजरिम संभल तो दूसरा बरेली जिले का
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जमीन की रंजिश में करीब साढ़े तीन साल पहले चाचा की हत्या में नामजद दो सगे भतीजों समेत चार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार ने दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि मुकदमे में किए गए नामजद मृतक के बड़े भाई और भाभी को बरी कर दिया है। चारों मुजरिमों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जमा होने पर डेढ़ लाख रुपया वादिनी को देने का भी आदेश सुनाया है।
हत्या की यह वारदात 27 जुलाई 2015 को थाना वजीरगंज क्षेत्र के गांव नंदवारी में हुई थी। उसी दिन वहां की प्रवेश कुमारी ने वजीरगंज थाने में रिपोर्ट लिखाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक प्रवेश कुमारी के पति रमेश चंद्र की जमीन के बंटवारे को लेकर अपने सगे बड़े भाई राजेंद्र से विवाद चल रहा था। इसी को लेकर घटना से एक दिन पहले राजेंद्र ने घर में घुसकर गाली-गलौज की थी। घटना वाले दिन सुबह करीब छह बजे उसके पति रमेश चंद्र जानवरों को भूसा डालने जा रहे थे। तभी राजेंद्र पुत्र पूरन लाल शर्मा, उसकी पत्नी पत्नी सर्वेश उर्फ मुन्नी, पुत्र शैलेंद्र शर्मा उर्फ हेमंत एवं धर्मेंद्र और रिश्तेदार सोमनाथ उर्फ सुभाष पुत्र रामनाथ निवासी अनिरुद्धपुर थाना अलीगंज (बरेली), रिंकू पुत्र विनोद निवासी बहजोई (संभल) ने एक राय होकर नाजायज असलहों से फायर किए। गोली लगने से रमेश चंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना के बाद सभी छह आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी प्रेम बाबू, अरविंद शर्मा एडवोकेट और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद शैलेंद्र उर्फ हेमंत, सोमनाथ उर्फ सुभाष, धर्मेंद्र उर्फ सुभाष और रिंकू को मुजरिम करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। चारों मुजरिमों पर कोर्ट ने 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। वहीं साक्ष्यों के अभाव मेें मृतक के बड़े भाई और भाभी को आरोपों से बरी कर दिया।