बाढ़ का पानी हुआ स्थिर, नावों के सहारे चल रही जिंदगी
शाहजहांपुर के बार्डर पर लगे गांव चापरकौरा में तेजी से हो रहा है कटान, गांवों में भरे पानी से परेशान हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं/ दातागंज। रामगंगा में आई बाढ़ गुरुवार को स्थिर रही। हालांकि करीब 50 गांव पूरी तरह से टापू बने रहे। हजारों बीघा जमीन पूरी तरह जलमग्न है। दूर-दूर तक पानी के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा है। प्रशासन ने इस इलाके के लोगों की सुविधा को रामगंगा में तीन नाव लगा दीं हैं। उन्हीं के जरिए अब लोग आ-जा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत जानवरों के सामने आ रही है। उनके चारे की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावितों की सुविधा को कोई राहत सामग्री नहीं भेजी है।
रामगंगा कुछ दिनों से पूरे उफान पर है। जिले में सबसे ज्यादा संवेदनशील बाढ़ चौकी नगरिया खनू से जुड़े सभी गांव इस वक्त बाढ़ की चपेट में हैं। देवचरी-हर्रेनगला और गढ़िया शाहपुर स्थित पुल पर पानी ऊपर चल रहा है। सबसे ज्यादा स्थिति मौसमपुर, सिमरिया, जडलौजी, सकतपुर आदि गांवों की खराब है। गुुरुवार को रामगंगा का पानी स्थिर रहा, लेकिन गांवों में पानी के बने रहने से लोगों को परेशानी रही। टापू बने गांवों के लोग अपने मजरे तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अब तक सैकड़ों की संख्या में कच्चे मकान बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं।
इधर,शाहजहांपुर जिले की सीमा से लगे गांव छोटा चापरकौरा में कटान तेजी से चल रहा है जिसकी वजह से लोग काफी चिंतित हैं।
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गंगा में लगाईं चार नाव-
दातागंज। गंगा भी पूरे शबाब पर है। गंगा से जुड़े दर्जनों गांवों में भी पानी घुस गया है। प्रशासन ने गंगा से जुड़े गांव जटा में तीन और बछौरा में एक नाव लगाई है।
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स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा महकमे को किया अलर्ट
दातागंज। एसडीएम दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र रामगंगा और गंगा में आज सात नाव लगवाईं। बोले-प्रशासन पूरी नजर रखे हुए हैं। बताया कि पानी स्थिर है। उम्मीद है कि जल्द ही गांवों में भरा पानी भी खत्म हो जाएगा।
एसडीएम ने कहा कि गांवों में पानी के भर जाने के बाद उसके स्थिर होने से बीमारियों संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा है सो सेहत महकमे को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही पशुओं में होने वाली गलाघोंटू, खुरपका आदि बीमारियों से बचाने को पशु चिकित्सा विभाग को भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
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दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं
दातागंज। कई दिनों से बाढ़ की चपेट में आए करीब 50 गांवों के लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पा रही है। सो वह शासन-प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत की ओर देख रहे हैं।
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क्या कहते हैं इलाके के लोग
रामगंगा में आई बाढ़ से किसान पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। उनकी खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गईं हैं। इस इलाके में उड़द और बाजरा की फसल ज्यादा होती है। सो नष्ट हो गई है।
-श्रीकृष्ण सिंह, प्रधानपति नगरिया खनू
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बाढ़ से हजारों बीघा फसल जलमग्न है। पानी के घटने के बाद भी वह किसी लायक नहीं रह पाएगी। इससे किसानों के सामने खुद के खाने के अनाज और जानवरों के चारे की ज्यादा समस्या आएगी। -मोरपाल सिंह यादव, प्रधान गांव शेरपुर पट्टी
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शासन-प्रशासन को चाहिए वह बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत राशि के साथ ही खाने-पीने का सामान भी उपलब्ध कराए।
-मंगद सिंह, प्रधान रम्पथुरा खुर्द
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बाढ़ से क्षेत्र का हर व्यक्ति तबाह हो गया है। पानी से उसकी फसल चौपट हो गई तो घरों में रखा सामान भी नष्ट हो गया। मुख्य फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि लोग अब कैसे रहेंगे।
-तपन सिंह, प्रधानपति,गांव कुडरा मजरा
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फोटो-53
फिलहाल ग्रामीणों को कोई राहत नहीं
सहसवान। गुरुवार को नरौरा बैराज से गंगा में छोेड़े जाने वाले पानी की मात्रा में मामूली कमी आयी। लेकिन इससे क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। गांवों में अब भी जलभराव की स्थिति यथावत बनी हुई है। संपर्क मार्ग कटे होने के चलते ग्रामीणों को आवागमन के लिए नावों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। तहसील प्रशासन और बाढ खण्ड हालात पर निगाह रखे हुए हैं।
गुरुवार को नरौरा बैराज से गंगा में एक लाख 86 हजार 893 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जो बुधवार के मुकाबले करीब 15 हजार क्यूसेक कम था। डिस्चार्ज कम होने के बाबजूद क्षेत्र में गंगा के जलस्तर में कोई कमी नहीं आई है। जीएम बांध के उस पार बसे गांव खागी नगला, भमरौलिया, वीर सहाय नगला, परशुराम नगला अभी भी जलमग्न है। सभी गांवों के संपर्क मार्ग कटे हुए हैं। ग्रामीण नावों से गांव में आ जा रहे हैं। बिजनौर से एक लाख 50 हजार 153 क्यूसेक, हरिद्वार से 74 हजार 439 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। शुक्रवार तक यहां पर पहुंच जाएगा। तहसीलदार राधेश्याम शर्मा ने बताया कि फिलहाल क्षेत्र में खतरे के हालात नहीं है।