गन्ना किसानों का चीनी मिलों बकाया है करीब 4,365 लाख रुपये
परंपरा निर्वहन को सूदखोरों के चक्कर काट रहे किसान
होली को किसानों समृद्धि और खुशहाली का त्योहार कहा जाता है, क्योंकि होली तक आलू और गेहूं की फसल खेतों से कटकर घरों में आ जाती है। गन्ना भी चीनी मिलों को भेजा जा चुका होता है और उनका भुगतान होने के बाद से किसान के पास अच्छी खासी धनराशि होती है। इससे वह अपने सभी जरूरी काम निपटाने के साथ त्योहारों की परंपराओं को भी निभाता है, लेकिन इस साल किसानों को गन्ना बकाए का भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इससे उनके परिवारों की होली पर रंगत फीकी ही रहेगी।
जिले के तमाम गरीब किसान परिवारों की स्थिति तो यह है कि होली मनाने के लिए उन लोगों को साहूकारों और ब्याज बट्टे का काम करने वालों के सामने उधार मांगना शुरू कर दिया है, जिससे होली पर होने वाली पारंपरिक रस्मों का निर्वाह किया जा सके। जिले में 20,783 हेक्टेयर में बोए गए गन्ने को छह चीनी मिलों में भेजा गया था। इनमें सर्वाधिक गन्ना जिले की बिसौली और शेखूपुर चीनी मिल को दिया गया था। शेष गन्ना चार चीनी मिलों और कोल्हूओं पर बेच दिया था।
बता दें कि जिले के 6,500 गन्ना किसानों ने चीनी मिलों को गन्ना बिक्री किया था। कुछ चीनी मिलों ने भुगतान करने में तेजी जरूर दिखाई, लेकिन अधिकांश मिलों की स्थिति बहुत खराब रही। इससे गन्ना किसानों का 4,365 लाख रुपये चीनी मिलें अब भी दबाए बैठी हैं। इन मिलों से भुगतान कराने के प्रयास अधिकारियों ने केवल दिखावे भर के किए हैं, जिससे चीनी मिलों ने भुगतान नहीं किया।
भाकियू के धरना-प्रदर्शन भी रहे नाकाम
बदायूं। गन्ना किसानों का बकाया भुगतान दिलाए जाने के लिए भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले गन्ना किसानों की ओर से तमाम धरना-प्रदर्शन किए गए, लेकिन इससे गन्ना किसानों का भुगतान नहीं हो सका। मिलों ने अपनी मनमानी करते हुए ही गन्ने का बकाया भुगतान किया।
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गन्ना बकाया भुगतान कराने के लिए चीनी मिलों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिससे कि किसानों को समय से उनका बकाया मूल्य मिल सके। बीते दिनों पर नजर डाली जाए तो काफी हद भुगतान कराया भी गया है और शेष भुगतान कराने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
-रामकिशन, सचिव, गन्ना सहकारी समिति