दो दिन में गंगा में छोड़ा गया 1.15 लाख क्यूसेक पानी
रामगंगा के जल स्तर में भी हो रहा धीरे-धीरे इजाफा
गंगा में बुधवार को भी नरौरा बैराज से 57524 क्यूसेक वाटर डिस्चार्ज किया गया। दो दिन में 1.15 लाख क्यूसेक से ज्यादा वाटर डिस्चार्ज किए जाने की वजह से गंगा ने कटान तेज कर दिया है। इधर, रामगंगा का जल स्तर भी रफ्ता-रफ्ता बढ़ने लगा है। हालांकि, दोनों नदियों में अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं। बाढ़ खंड स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
गंगा और रामगंगा हर साल जिले में बाढ़ से तबाही मचाती हैं। दोनों नदियों के तटवर्ती करीब 250 गांवों के लोगों की नजर दोनों नदियों के रुख पर है। कादरचौक, उसहैत, दातागंज, सहसवान, कछला, उसावां में करीब 250 गांव ऐसे हैं जो बाढ़ के दौरान इन नदियों के निशाने पर आ जाते हैं। मंगलवार को नरौरा बैराज से गंगा में 57724 क्यूसेक वाटर डिस्चार्ज किया गया था। बुधवार को भी गंगा में नरौरा से 57524 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे गंगा ने कटान तेज कर दिया है। सहसवान की महाबा नदी के जल स्तर में भी इजाफा हो रहा है। गंगा-महावा बांध पर शरण लेने के लिए कई गांवों के लोग अभी से जगह तलाशने लगे हैं। यहां काफी जमीन गंगा में पहले ही समा चुकी है। इधर, रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। दातागंज तहसील बाढ़ के लिहाज से सबसे संवेदनशील है। इस तहसील में गंगा और रामगंगा दोनों नदियां बहती हैं। दातागंज में सबसे ज्यादा 17 बाढ़ चौकियां हैं। दोनों नदियों के रुख को देखते हुए बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार वर्मा के मुताबिक फिलहाल स्थिति सामान्य है। गंगा का मीटर गेज फिलहाल 162.37 के आस-पास बना हुआ है।
बता दें कि गंगा में इस सीजन का सबसे ज्यादा वाटर डिस्चार्ज 14 और 15 जुलाई को हुआ था। नरौरा बैराज से 14 जुलाई को 95 हजार और 15 जुलाई को 105345 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। दो दिन में 200345 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा में बाढ़ के हालात पैदा हो गए थे। इसके बाद वाटर डिस्चार्ज को कम कर दिया गया। इससे हालात सामान्य हो गए थे। दो लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आने की वजह से गंगा कई दिन तक उफान पर रही थीं।