बदायूं। शहर में किसी वारदात के होने पर यदि अपराधी भाग जाता है तो पुलिस को उसकी पहचान करना टेड़ी खीर साबित होगा। ऐसा हो भी रहा है। चेन स्नेचिंग हो या झपटमारी, बदमाश वारदात करके पलक झपकते ही नदारद हो जाते हैं और पुलिस लकीर पीटती रह जाती है। बदमाश को पकड़ना तो दूर उसकी पहचान तक नहीं हो पाती। ऐसे में अपराधियों के हौसले बुलंद हो चले हैं। ऐसी वारदात पर अंकुश लगाने तथा बदमाशों की पहचान करने के उद्देश्य से कई सालों पहले शहर के प्रमुख चौराहों पर ‘तीसरी आंख’ यानी सीसीटीवी कैमरों को लगाया गया था, लेकिन बदइंतजामी के चलते ये लगभग बंद हो चुके हैं।
कुछ साल पहले पुलिस ने शहर की निगरानी को प्रमुख तिराहों और चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। इसके पीछे पुलिस की मंशा थी कि असामाजिक तत्वों पर गंभीरता से नजर रखी जा सके। वे जिस ओर से वारदात करके भागें, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उनकी पहचान हो सके और पकड़कर उन्हें जेल भेजा जा सके। शहर के कई प्रमुख स्थानों पर करीब 45-50 सीसीटीवी लगे थे लेकिन धीरे-धीरे करके ये एक-एक करके नदारद हो गए। आज हालात यह हैं कि शहर के लावेला चौक, कचहरी तिराहा, पुलिस लाइन चौराहा, इंदिरा चौक आदि जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर कैमरे हैं ही नहीं। छह सड़का पर सिर्फ एक कैमरा चल रहा है, वह भी एक ही तरफ का नजारा दिखा सकता है। बाकी उसके पीछे क्या हो रहा है, इसका पता नहीं चलता। पूरे शहर में अब सिर्फ 10 या 15 कैमरे ही चल रहे हैं। बाकी स्थानों के कैमरे सिर्फ शोपीस बनकर लटक रहे हैं। ऐसे में यदि कोई बड़ी वारदात हो जाए, तो पुलिस के सामने इधर-उधर देखने के सिवा कोई चारा नहीं होगा। तब तक अपराधी मौके से फरार हो चुका होगा और पुलिस हवा में लाठी पीटती रहेगी।
दो माह पहले चला अभियान, फिर हुआ ठप
ऐसा नहीं है कि पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे सही कराने के लिए अभियान न चलाया हो। करीब दो माह पहले पुलिस विभाग की ओर से इन्हें मरम्मत के लिए उतारा गया था, लेकिन उसके बाद न तो कैमरे लगे और न ही उनकी मरम्मत हो पाई। तभी से शहर के तिराहे-चौराहे सीसीटीवी कैमरा विहीन पड़े हैं।
घटना के बाद बगलें झांकती है पुलिस
शहर में कई ऐसी वारदता हुई हैं, जिनकी छानबीन के दौरान पुलिस को सीसीटीवी कैमरों की कमी महसूस हुई है। उसके बाद पुलिस ने आसपास की दुकानों और प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद ली। अगर घटनास्थल और उसके आसपास दुकानों पर कैमरे न लगे हों तो पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पाती।
फुटेज नहीं मिलने पर अटकी हैं कई जांच
लावेला चौक के नजदीक भारतीय स्टेट बैंक के सामने अस्पताल कर्मचारी के ढाई लाख रुपये चोरी हो गए थे। बैंक में सीसीटीवी कैमरे तो लगे थे लेकिन उस दिन कैमरे खराब बताए गए। अगर उस दिन कैमरे सही होते तो शायद पुलिस अपराधी तक पहुंच जाती। आज तक पुलिस पता नहीं लगा सकी है कि अस्पताल कर्मचारी के रुपये कौन ले गया।
शहर में तिराहे-चौराहे चौड़ीकरण के दौरान सीसीटीवी कैमरे उतारे गए थे। कुछ कैमरे खराब भी हो गए थे, जिन्हें मरम्मत के लिए भेजा गया है। उनके आने पर नए सिरे से कैमरे लगाए जाएंगे। जल्द ही यह व्यवस्था भी सुधर जाएगी।
- जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी सिटी