उझानी (बदायूं)। मेरे राम सेवा समिति के तत्वावधान में बाबू राम धर्मशाला में चल रही सेवा और संस्कारों को समर्पित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन कथावाचक रवि जी समदर्शी महाराज ने विश्वामित्र का श्रीराम-लक्षमण के साथ जनकपुरी प्रस्थान, शिव धनुष और श्री राम विवाह के प्रसंग सुनाए। कहा कि भगवान परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए ही प्रभु राम सहज हो गए।
कथावाचक रवि जी समदर्शी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम को विश्वामित्र अपने साथ जनकपुरी लेकर गए थे। उनके साथ भाई लक्ष्मण भी थे। भगवान राम ने राजा जनक, अपने गुरु, धरती माता, सूर्य, चंद्र आदि को प्रणाम कर अपनी मर्यादा का परिचय दिया। सीता स्वयंवर में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने गुरु की आज्ञा पाकर भगवान शिव के धनुष को प्रणाम कर उठाया और प्रत्यंचा खींचकर धनुष को तोड़ दिया। चूंकि धनुष टूटने की आवाज तीनों लोकों में गूंजी धरती कांप गई। सागर में खलबली मची और सूर्य के रथ की दिशा बदल गई। भगवान परशुराम क्रोधित हो गए। वह दौड़ कर जनक दरबार में पहुंचे तो उनका क्रोध शांत करना मुश्किल था। लक्ष्मण-परशुराम के संवाद के बाद श्रीराम ने जिस सहजता से उन्हें शांत किया, परशुराम खुद प्रभु की दयालुता को देख नतमस्तक हो गए। रवि जी महाराज ने सीता से जुड़ा प्रसंग भी सुनाया। वृंदावन के देवाचार्य ने मंत्रोच्चार किया। शक्तिकलश और श्रीगणेश का पूजन भी कराया। इस मौके पर श्वेता छाबड़ा, देवेश गुलाटी, संदीप अग्रवाल, हिमांशु कृष्ण आदि मौजूद रहे।