फोटो - 02 बीडीएन 16, 17
जिले को सोने के रंग में
रंगने की जिद में मानसी
- भारत्तोलन में बड़ों को भी मात दे रही मानसी चामुंडा
- उम्र 13 साल और वजन उठा रही 45 किलो
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। स्वभाव नखरीला, चेहरे पर हमेशा गुस्सा, लेकिन जहन में ओलंपिक पदकधारी मीरा चानू जैसा बनने का ख्वाब लिए एक उदीयमान भारत्तोलन की खिलाड़ी पिछले दो वर्षों से स्पोर्ट्स स्टेडियम में जमकर पसीना बहा रहा है। शहर के राजाराम इंटर कॉलेज में कक्षा आठ की छात्रा मानसी चामुंडा दो वर्षों से शहर के स्पोर्ट्स स्टेडियम में भारत्तोलन की ट्रेनिंग ले रही हैं। वह शहर के जालंधरी सराय मोहल्ले में रहती हैं। हैरत की बात तो यह है कि महज 13 साल की उम्र में मानसी भारत्तोलन की दो कैटेगरी 38 और 45 किलो भार वर्ग मेें अग्रणी हैं। उसकी जीतोड़ मेहनत देखकर तो यही लग रहा है कि आने वाले समय में वह जिले को सोने के रंग में जरूर रंगेंगी। चूंकि इस खेल में प्रतिभा पेश करने के लिए कम से कम 14 वर्ष की आयु होनी चाहिए। इस आयु से मानसी महज एक कदम दूर है। आयु वर्ष में प्रवेश करने के बाद से उसकी प्रतिभा देख हर कोई अचंभित जरूर होगा।
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दोस्त बनाना पसंद नहीं
मानसी कहती हैं कि उन्हें दोस्त बनाना पसंद नहीं है। स्कूल में वह किसी भी छात्रा से ज्यादा बात नहीं करती हैं। उनका अब एक ही लक्ष्य है कि खेल को और निखार कर उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर जिले का नाम रोशन किया जाए।
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पिता को है बेटी पर नाज
मानसी के पिता सुरेंद्र नारायण चामुंडा ने बताया कि मानसी की मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी। इतनी कम उम्र में इतना जोश देखकर वह भी कभी-कभी हतप्रभ रहे जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानसी अगर ऊंचे मुकाम तक पहुंचती है तो इसकी पूरा श्रेय उसके दोनों कोचों राजीव कुमार और दिलीप जोशी को जाएगा।