दलित महिला की गैर इरादतन हत्या में एक व्यक्ति को उम्रकैद
पांच हजार का दंड भी पड़ा, इस्लामनगर क्षेत्र में पांच साल पहले हुई थी वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
दलित महिला की गैर इरादतन हत्या के जुर्म में स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट अशोक कुमार सप्तम ने एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह घटना थाना इस्लामनगर क्षेत्र के गांव नगला बारह में 11 जून 2013 को हुई थी। वहां के हुकुमपाल पुत्र बन्नू ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वादी की बेटी सीमा को गांव के नन्हे सिंह पुत्र रामवीर सिंह ने अपने घर पानी भरने को बुलाया था। सीमा काम में व्यस्त होने की वजह से नहीं जा सकी। इतनी सी बात से नन्हे बौखला गया। उसने घर के सामने होकर गुजरते समय सीमा के पिता हुकुमपाल को पीटा था। हुकुमपाल किसी तरह बचकर अपने घर की ओर भागे। तभी उनका पीछा करते हुए नन्हे ने ईंट-पत्थर फेंककर मारे। सीमा की मां शांति बीच बचाव करने पहुंची। नन्हे की फेंकी ईंट शांति के सिर में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। इलाज के लिए इस्लामनगर ले जाते वक्त शांति ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में गैर इरातन हत्या और एससी-एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी।
स्पेशल जज अशोक कुमार सप्तम ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद मुजरिम नन्हे सिंह को एससी-एसटी एक्ट के साथ गैरइरादन हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मुजरिम पर पांच हजार का अर्थदंड भी लगाया है।
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दबंगई में रंगे खून से हाथ, अब सलाखों के पीछे कटेगी जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। नन्हे ने गांव में दबंगई कायम करने को अपने हाथ खून से रंग लिए थे। दलित की बेटी के पानी न भरने की मामूली सी बात पर दबंग ने सरेआम मारपीट की। इतने पर भी गुस्सा शांत नहीं हुआ तो ईंट-पत्थर फेंककर मारे। इसमें दलित महिला शांति देवी की जान चली गई। अब इस मामले में कोर्ट ने मुजरिम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दरअसल, हुकुम सिंह खेतीबाड़ी करके परिवार का पालन पोषण कर रहा था। उसका गांव वालों से कभी झगड़ा भी नहीं होता था, लेकिन नन्हे ने उसकी बेटी सीमा से खुद ही कहा था कि वह घर जाकर उसका पानी भर दें। सीमा तब यह कह चली गई थी कि वह लौटकर आती है। किंतु वह घर जाकर अपने काम में व्यस्त हो गई। भूल गई कि नन्हे ने उससे पानी भरने को कहा है। तभी हुकुम सिंह कहीं से आ रहे थे। नन्हे ने उन्हें जातिसूचक गालियां देनी शुरू कर दीं। हुकुम सिंह कुछ समझ नहीं पाया था कि आखिर नन्हे उन्हें गाली क्यों दे रहा है और क्यों हमलावर हो गया है। वह समझ चुके थे कि नन्हें के हमले से बच जाना ही बेहतर है नहीं तो वह कुछ भी कर सकता है। सो वह घर की ओर भाग गए। उनकी पत्नी शांति ने जब नजारा देखा तो वह चौंक गई। कुछ समझ पातीं कि नन्हे ने उन पर भी ईंटें बरसा डाली। एक ईंट से शांति के प्राण पखेरु उड़ गए।
कोर्ट ने शांति की गैरइरातन हत्या को गंभीर माना। स्पेशल जज अशोक कुमार सप्तम ने अपने फैसले में कहा है कि चूंकि धारा 304 आईपीसी के द्वितीय भाग में दंडनीय अपराध 10 वर्ष का है। साथ ही एससी-एसटी एक्ट के प्रभाव से यह अपराध इस धारा के साथ सपठित होकर आजीवन कारावास के दंड से दंडनीय विधि अनुसार होगा।