फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो विभागों की लड़ाई में बदसूरत बना शहर

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो-6 से 9-
विज्ञापन

दो विभागों की लड़ाई
में बदसूरत बना शहर
साढ़े चार करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया फिर भी नहीं होने दे रही पालिका काम
भूमिगत केबल डाले जाने का रुका पड़ा है कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। कटिया डालकर बिजली चोरी रोकने को शहर में एक साल से भी ज्यादा समय से भूमिगत केबल डाले जाने का कार्य चल रहा था। मगर अब नगर पालिका परिषद ने उनके काम पर रोक लगा दी है। वजह है कि पालिका सड़क की पटरी नहीं खोदने दे रही है। बिजली अफसरों का कहना है कि पालिका जानबूझकर इस कार्य में बाधा बनी हुई है। जबकि बिजली विभाग पहले ही सड़कों की मरम्मत को 459 लाख रुपये पालिका को दे चुका है।
शासन का पूरा ध्यान बिजली चोरी रोकने पर है। इसको लेेकर उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन ने इस योजना के तहत हर जिले में तारों के जाल को खत्म करने के लिए भूमिगत केबल डालने की योजना शुरू की। इस योजना के पीछे पॉवर कारपोरेशन का यह भी मानना था कि ऊपरी तारों से हादसे भी होते रहते हैं। साथ ही शहर की सूरत भी खराब लगती है। शहर में भूमिगत केबल डालने की जिम्मेदारी एक संस्था को सौंपी गई। इसमें तय किया गया था कि भूमिगत केबल डाले जाने से पहले पॉवर कारपोरेशन नगर पालिका परिषद को सड़कों के होने वाले नुकसान की भरपाई को मुआवजा देगी। जो बिजली विभाग की ओर से पालिका को दे दिए गए। इसके बाद शहर में अंडरग्राउंड केबल डालने काम शुरू हो गया। लेकिन पालिका के चुनाव के बाद से एकाएक इस काम पर रोक लग गई। इसको लेकर पालिका का कहना था कार्यदायी संस्था मानक के अनुरूप काम नहीं कर रही है। जनता लगातार शिकायतें कर रही है। लोगों का आरोप था कि भूमिगत केबल को उतने नीचे नहीं डाला गया जितना मानक था। जिसकी वजह से लोगों को यह भी अंदेशा सताने लगा कि बरसात के मौसम में कभी भी करंट दौड़ सकता है। लोगों की यह भी शिकायत थी कि सड़क के बीच में ही बॉक्स लगाए गए। इसकी वजह से आवागमन में दिक्कत हो रही है। पालिका प्रशासन ने इन्हीं सब बातों पर कार्यदाई से संस्था को काम करने से रोक दिया। तब से बिजली विभाग भी परेशान है। यह बात डीएम तक पहुंची थी। डीएम दिनेश कुमार सिंह ने पालिका को निर्देश दिए कि वह बिजली विभाग को अपना काम करने दें। इसमें कोई भी समस्या उत्पन्न नहीं होने दी जाए। साथ ही बिजली विभाग के अधिकारियों को चेताया था कि सड़क किनारे लगे बॉक्स को एक साइड में लगाएं और मानक के अनुसार केबल डालें।
विज्ञापन

---------------
पालिका को विभाग की ओर से करीब एक साल पहले 4.59 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी पालिका ने काम पर रोक लगा दी है। जो गलत है। यह पूरी तरह से शासन के कार्य में हस्तक्षेप है।
विज्ञापन

-मधुप श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता
-----------
विकास के मामले में पालिका को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत सिर्फ यही है कि मानक के अनुरूप काम नहीं किया जा रहा है। जिसकी वजह से भूमिगत केबल डाले जाने का काम रुका पड़ा है। बिजली विभाग की टीम से उन्होंने स्वयं कहा था कि वह कुछ स्थानों पर साथ चले और कराए गए कार्य को देखें। तब दो स्थान पर कमी मिलने पर बिजली महकमे की टीम खिसक ली।
-दीपमाला गोयल, चेयरमैन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें