एआरटीओ दफ्तर के चक्कर लगा रहे आवेदक
बदायूं। एआरटीओ दफ्तर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया पूरी कर चुके आवेदक 15 दिन बाद भी लाइसेंस के लिए तरस रहे हैं। डाक विभाग ने अब तक इनके लाइसेंस इनके पतों पर नहीं भेजे हैं। परेशान आवेदक कभी परिवहन कार्यालय तो कभी डाकघर के चक्कर काट रहे हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस प्रशिक्षु श्रेणी का हो या स्थाई, अब उसे सीधे तौर पर आवेदक को नहीं दिया जाता। फर्जीवाड़े से बचने के लिए नियम बनाया गया है कि डीएल अब आवेदक के मूल पते पर डाक से पहुंचाया जाएगा। कई आवेदकों के लाइसेंस 15 दिन बाद भी उनके पतों पर नहीं पहुंचे हैं। ऐसे लोगों ने एआरटीओ दफ्तर में संपर्क किया तो पता लगा कि यहां से लाइसेंस डिस्पैच हो चुका है। पंजीकृत डाक से उसे भेजा भी जा चुका है। इनमें से कई आवेदकों ने स्टेटस देखने के लिए संबंधित डाकघरों की भी दौड़ लगाई पर अधिकांश को लाइसेंस की सही लोकेशन नहीं मिल सकी। कुछ ने एआरटीओ कार्यालय से ही लाइसेंस की दूसरी प्रति निकलवा ली है। अधिकारी भी इस विषय में उन्हें सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।
लाइसेंस जारी होने में कुछ समय हमारे दफ्तर में भी लग जाता है। हालांकि इस समय जो समस्या है वह डाक विभाग के स्तर से है। वहीं से देरी हो रही है। आवेदकों की शिकायतों के बाद हमने डाक अधीक्षक को पत्र लिखकर समस्या के बारे में भी बताया है।
- एनसी शर्मा, एआरटीओ प्रशासन
कुछ डीएल इस वजह से नहीं पहुंच पाते कि उन पर नाम पता स्पष्ट नहीं लिखा होता। पता बिल्कुल साफ लिखा होना चाहिए। संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर लिख दें तो और सही रहेगा। स्टाफ कम होने से कुछ समस्या हुई है। जल्दी ही व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी।
- बीआर राना, पोस्टमास्टर, मुख्य डाकघर