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गंगा तट पर कल्पवास से मिलती है मानसिक शांति

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साधु-संत। - फोटो : अमर उजाला
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मेला ककोड़ा। स्कंध पुराण में जिक्र है कि कार्तिक के समान कोई माह नहीं है और सतयुग के समान कोई युग नहीं हैं। वेदों के समान शास्त्र नहीं है और गंगा के समान तीर्थ नहीं है। कार्तिक माह में गंगा स्नान और गंगा मे दीपदान का विशेष महत्व है। ऐसी ही कई धार्मिक मान्यताओं को मानने वाले लोग मेला ककोड़ा में तंबू लगाकर रह रहे हैं। कुछ ने एकाकी रहने का फैसला लिया है तो कुछ परिवार के साथ आए हैं। धर्मकर्म के अलावा बड़ा लाभ यह लोग मानसिक शांति को मानकर चल रहे हैं।
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मेले में हजारों तंबू अब भी लगे हुए हैं। मौज मस्ती के लिए मेला जाने वाले लोग रविवार के बाद लौटने लगे हैं तो कल्पवास के इरादे से गए लोगों ने अभी और रुकने का फैसला किया है। लोग तंबू लगाकर रह रहे हैं और वहीं खिचड़ी आदि बनाकर खा रहे हैं। कई लोगों का ज्यादातर समय स्नान और ध्यान में बीत रहा है। लोग कभी गंगा तट पर ध्यान लगाकर बैठ जाते हैं तो कभी तंबू में ही माला जप रहे हैं। सरकारी कर्मचारी और व्यावसायिक गतिविधियों में साल भर लगे रहने वाले लोग भी कल्पवास को आए हैं। अधिकतर ने अपने मोबाइल बंद कर रखे हैं और बेहद जरूरत होने पर खुद ही कॉल करके परिवार से कुशलता पूछ लेते हैं।
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मेले में हमारा परिवार बरसों से आता रहा है। कल्पवास करने से आत्मिक शांति मिलती है। यहां गंगा के तट पर कुछ समय गुजारने से वर्ष भर शांति- सुख से रहने की मान्यता है।
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- अशोक शर्मा, ककोड़ा
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गंगा तट पर बच्चों के मनोरंजन के साथ मां गंगा की गोद में देव उपासना करने का अलग ही आनंद है। इससे बड़ा पुण्य मिलता है।
- वीरेश तोमर, बदायूं
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गंगा मोक्ष देने वाली हैं। यहां आकर लोग स्वयं को धन्य मानते हैं। पांच पर्व यहां गंगा स्नान के होते हैं। लोग परिवार सहित इनका पुण्य लेते हैं। संतों के साथ लोग प्रवचन भी सुनते हैं।
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- परमात्मा दास, पापड़ आश्रम
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