बदायूं। दिवाली पर अकेले शहर के लोगों ने 20 लाख से अधिक की आतिशबाजी छोड़ी। लोगों ने परंपरागत तरीके से अपने घरों को रोशनी और रंगोली का सजाया। शाम होते ही आतिशबाजी भी शुरू हो गई।
पर्यावरण संरक्षण की सारी जद्दोजहद दिवाली पर बेमानी दिखी। शहर से लेकर कस्बों तक लोगों ने जमकर पटाखों की खरीदारी की। हालांकि, पटाखों के लिए जिला प्रशासन की ओर से स्थान निश्चित किया गया था, बावजूद इसके शहर के कई अन्य जगहों पर भी चोरी-छिपे अस्थायी दुकानों पर पटाखे बिकते दिखे। पटाखा दुकानदारों के मुताबिक करीब 20 लाख रुपये की बिक्री का अनुमान है। ऐसे में प्रदूषण काफी बढ़ गया।
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जहरीली गैसों से दमा के रोगी बढ़े
पटाखों और फुलझड़ी चलाने पर निकलने वाली गैसों से अच्छे-खासे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती हैं। जिला चिकित्साधिकारी डॉ.नेमी चंद्रा ने बताया कि पटाखों के चालाने से प्रदूषण की वजह से ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। दमा के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। वातावरण में प्रदूषण बढ़ जाता है, ऐसे में आंखों पर भी इनका बुरा असर पड़ता है।
ध्वनि प्रदूषण
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दिपावली शाम को ही पटाखों की धामाकेदार आवाजें शुरू हो गई। इससे सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों को हुई। उन्होंने पटाखों की आवाज से बचने के लिए कमरे की किवाड़ों को बंद रखा।
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वायु प्रदूषण
पटाखे बनाने में कई प्रकार के पदार्थ मिलाए जाते हैं। इनमें अलग-अलग जहरीले गैस निकलती है। इन गैसों से दम घुटने की बीमारी होती है।