बदायूं। जिले की महिलाएं अपने नाम पर वाहन खरीदने में तो आगे हैं, लेकिन उन्हें चलाने से पीछे हट रही हैं। एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार करीब 50 हजार दोपहिया और चार पहिया वाहन महिलाओं के नाम पर पंजीकृत हैं। इसके सापेक्ष ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ पांच हजार महिलाओं ने ही बनवाए हैं। जिले में महिलाओं के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की संख्या पुरुषों की तुलना में भी काफी कम है।
एआरटीओ के रिकॉर्ड के मुताबिक, हर साल पंजीकृत होने वाली करीब 25 फीसदी गाड़ियां महिलाओं के नाम हैं। पिछले छह माह में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हर साल करीब सात से आठ हजार ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। इसमें भारी वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस शामिल नहीं हैं। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं बहुत पीछे हैं।
पांच हजार का है जुर्माना
एआरटीओ ने बताया कि बगैर लाइसेंस के वाहन चलाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये का जुर्माना है। यदि चालक के पास डीएल नहीं है तो दुर्घटना होने की स्थिति में बीमा क्लेम नहीं मिलता।
कोट
- गाड़ी भले ही महिलाओं के नाम पंजीकृत हैं, लेकिन उनके लाइसेंस की संख्या कम है। छात्राएं और कामकाजी महिलाएं ही लाइसेंस बनवा रही हैं। इसके लिए अभिभावकों की सोच भी जिम्मेदार है। जागरूकता लाने की जरूरत है। - रामवचन गुप्ता, एआरटीओ