बदायूं। सफाई कर्मियों के एरियर भुगतान को मिले चार करोड़ रुपये शासन को वापस भेज देने के मामले में सीडीओ निशा अनंत के कड़ा रुख अपनाने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में खलबली मची है। सीडीओ के जवाब-तलब करने पर डीपीआरओ ने खुद को सुरक्षित करते हुए पूरी तरह से लिपिक कालीचरन को दोषी ठहरा दिया है। डीपीआरओ ने लिपिक को आठ बिंदुओं पर आरोप पत्र देते हुए एक सप्ताह के अंदर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
जिले के गांवों में तैनात अनुसूचित जाति के सफाई कर्मचारियों के वर्ष 2008 के अलावा सातवें वेतनमान के एरियर के भुगतान को शासन से ढाई करोड़ तथा पिछड़ा वर्ग के लिए डेढ़ करोड़ का बजट मिला था, लेकिन एरियर का भुगतान सफाई कर्मियों को नहीं किया गया, जबकि वह लगातार इसकी मांग डीपीआरओ और लिपिक से करते आ रहे थे। सफाई कर्मियों ने पिछले दिनों सीडीओ से मिलकर इस बात का आरोप लगाया था कि लिपिक ने मनमानी करते हुए उनके एरियर के भुगतान को आया चार करोड़ शासन को वापस भेज दिया है। यह सुनकर सीडीओ निशा अनंत भी चौक गईं थीं। उन्होंने तत्काल ही डीपीआरओ शशिकांत पांडेय को पत्र जारी कर जवाब-तलब किया था। तब डीपीआरओ कार्यालय के सभी कर्मचारियों में भी खलबली मच गई।
वहीं गुरुवार को डीपीआरओ ने अपनी सफाई देते हुए इस मामले में पूरी तरह से कनिष्ठ लिपिक कालीचरन को दोषी ठहराया है। लिपिक को दिए आठ बिंदुओं के आरोप पत्र में कहा है कि उन्हें गुमराह करते हुए उन्होंने बजट समर्पित करा दिया। इस लापरवाही की वजह से सफाई कर्मियों को एरियर का भुगतान नहीं किया जा सका। डीपीआरओ ने बताया कि लिपिक को एक सप्ताह के भीतर लिखित तौर पर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
...तो क्या डीपीआरओ ने पत्र देखा ही नहीं
सवाल उठ रहा है जब लिपिक ने बजट को समर्पित करने संबंधी फाइल डीपीआरओ के समक्ष पेश की थी। तब क्या उन्होंने उसे गंभीरता से देखा नहीं था।