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2.98 लाख केसीसी धारक, फसल बीमा सिर्फ साढ़े तेरह हजार का
किसानों को नहीं किया जा रहा जागरूक, प्रचार-प्रसार के अभाव में लोग नहीं ले पा रहे योजना का लाभ अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केवल हवा में दौड़ रही है। केंद्र सरकार के चार साल के कार्यकाल में दस प्रतिशत किसानों की फसलों का बीमा भी नहीं हुआ। जिले में कुल 4 लाख 27 हजार लघु और सीमांत किसान हैं। इनमें दो लाख 98 हजार किसान केसीसी धारक हैं। पिछले वित्तीय वर्ष (2017-18) में जिले में केवल 13,667 किसानों की फसलों का बीमा हो सका।
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यह है योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को नुकसान से बचाने के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत किसान अपनी फसल का बीमा बहुत सस्ती दरों में करा सकते हैं। फसल खराब होने पर किसान को बीमा की धनराशि दी जाता है। इसमें 25 प्रतिशत धनराशि का तुरंत भुगतान किया जाता है। इस योजना को सफल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों अपना-अपना योगदान करती है।
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बीमा योजना की दरें
बागवानी में फूलों और फल के बगीचे शामिल हैं। इन सब पर पांच प्रतिशत की दर से प्रीमियम भरकर बीमा करवाया जा सकता है। जैसे एक लाख का बीमा करवाना है तो आपको प्रीमियम के तौर पर 5000 रुपये देने होंगे। खरीफ की फसल मसलन धान, बाजरा, मक्का, ज्वार, गन्ना इत्यादि में प्रीमियम की दर दो प्रतिशत है। यानी एक लाख के बीमे पर लगभग 2000 रुपये प्रीमियम देना होगा। रबी की फसलों मसलन गेहूं, जौ, सरसों, चना, मसूर इत्यादि के लिए प्रीमियम की दर डेढ़ प्रतिशत है। इसमें एक लाख के बीमा पर लगभग 1500 रुपये प्रीमियम देना होगा।
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ऐसे करें आवेदन
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल का बीमा करने के लिए भारत सरकार की कॉर्प इंश्योरेशन नामक वेबसाइट है। इस पर किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसान को आधार कार्ड, पते के लिए पहचान पत्र या आधार कार्ड, बोई गई फसल हेक्टेयर में, फसल बोने की तिथि, कैंसिल चेक, बैंक पासबुक, जमीन के कागज, आवेदनकर्ता की फोटो आदि जमा करनी होगी।
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क्या बोले किसान
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योजना केवल दिखावा
फसल बीमा योजना केवल दिखावा है। इससे किसानों को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। किसान केवल विभागों के चक्कर काटते हैं। वहां से उन्हें कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
-राम बाबू
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लाभ नहीं मिला योजना का
जब बरसात की वजह से फसल गिर गई और खराब हो गई। जब इसके बारे में अधिकारियों से बात की तो कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ। ऐसे करते-करते समय निकल गया और योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
-जसवीर सिंह
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नहीं मिलता है सहयोग
बीमा करने के समय तो अधिकारी किसानों का काफी सहयोग करने की बात करते हैं। लेकिन जब तक फसल सही है तो अधिकारी भी ठीक रहते हैं। जैसे ही फसल पर आपदा आती है वह लोग किसानों से नजर फेर लेते हैं।
-नरेंद्र सिंह
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सिर्फ टालते रहे हैं अधिकारी
कभी बैंक के तो कभी अधिकारियों के चक्कर लगाने तक काम रह गया है। कोई भी सही बात बताने के लिए तैयार नहीं होता है। आज आना कल आना, ऐसे ही बातों को टालते रहते हैं।
-अबरार अहमद
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वर्जन--
लगातार किसानों को योजना के बारे में जानकारी देते रहे हैं। उन्हें गोष्ठियों के माध्यम से भी जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। कोशिश रहती है कि किसानों को कोई दिक्कत न हो।
- विनोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी