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कैसे दक्ष हों नौजवान, एक भवन में हैं चार आईटीआई

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कैसे दक्ष हों नौजवान, एक
भवन में हैं चार आईटीआई
-संसाधनों और स्टाफ के अभाव में ढोई जा रही व्यवस्था
-एक-दो कमरों में चलती है पढ़ाई, प्रैक्टिकल भी कागजों में
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
एक ओर जहां सरकार तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देकर स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के नए रास्ते खोलने की बात कह रही है वहीं दूसरी ओर संसाधनों के अभाव में तकनीकी शिक्षा बेदम होने के कगार पर है। शहर से सटे सालारपुर की आईटीआई में जिले की चार और आईटीआई संचालित हैं। इनमें से किसी में प्राचार्य नहीं हैं तो किसी में अनुदेशक। प्रयोगात्मक क्रियाकलाप भी बस कागजों में ही कराए जा रहे हैं।
बदायूं की मुख्य आईटीआई आंवला रोड पर सालारपुर में है। इसी भवन में इस समय दातागंज, दहगवां और कादरचौक की आईटीआई संचालित हैं। इससे पहले बिसौली, बिल्सी की आईटीआई भी कई साल से यहीं चल रही थीं। बिल्सी की आईटीआई दो साल पहले शिफ्ट हुई है तो बिसौली आईटीआई इसी महीने वहां रतनपुर कोट में बने नए भवन में ट्रांसफर की गई है। कहने को तो दहगवां की आईटीआई चौड़ेरा गांव में कादरचौक की रमजानपुर में तो दातागंज की समरेर में बनाई जा रही है और इसी साल आईटीआई वहां शिफ्ट करने की योजना है। फिलहाल तो हालात काफी नाजुक हैं। बदायूं आईटीआई को छोड़ दें तो बाकी आईटीआई को मुख्य भवन में एक या दो कक्ष आवंटित कर दिए गए हैं और अधिकतर कार्य सामूहिक तौर पर ही होता है। इसमें लेखन आदि क्रियाकलाप ही हो पाते हैं, प्रयोगात्मक कार्य लगभग कागजों में चल रहा है।
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चार आईटीआई में नही हैं प्रधानाचार्य
जिले की सभी आईटीआई में स्टाफ की भारी कमी है। यहां तक कि छह आईटीआई में केवल दो में ही प्रधानाचार्य हैं। इनमें बदायूं के प्रधानाचार्य राजीव कुमार पर दहगवां, कादरचौक, बिसौली का अतिरिक्त चार्ज है। वहीं दातागंज आईटीआई के प्रधानाचार्य धर्मेंद्र सिंह पर बिल्सी का अतिरिक्त प्रभार है। बदायूं आईटीआई में कार्यदेशक के दो पदों में केवल एक पर गिरधारी सिंह राठौर कार्यरत हैं। उनके अलावा अनुदेशकों के बीस पदों में से आठ खाली पड़े हैं। इसके साथ ही आठ ट्रेड वाली बिसौली आईटीआई में केवल दो अनुदेशक, बारह ट्रेड वाली दातागंज में सात अनुदेशक, बारह ट्रेड वाली बिल्सी में पांच अनुदेशक ही कार्यरत हैं। दहगवां और कादरचौक की आईटीआई में कोई अनुदेशक नहीं है। जाहिर है कि ऐसे में केवल काम ही चलाया जा रहा है। समझा जा सकता है कि किसी खास ट्रेड के अनुदेशक जब हैं ही नहीं तो या तो उस विषय की पढ़ाई कागजों में चल रही है या फिर दूसरी ट्रेड के अनुदेशक ही प्रशि क्षुओं को आधा अधूरा ज्ञान दे रहे हैं।
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इन ट्रेड में होती है पढ़ाई
बदायूं आईटीआई में इलेक्ट्रिकल एंड वेंडर, फिटर, मोटर मैकेनिक, स्टेनोग्राफी हिंदी, सीट मेटर, वायरमैन, इलेक्ट्रिकल पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन, कढ़ाई और सुई टेक्नोलॉजी ट्रेड्स हैं। इनमें सैकड़ों प्रशिक्षु प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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मौजूद संसाधनों में दे रहे बेहतर प्रशिक्षण
इस समय तीन और स्थानों की आईटीआई हमारे कैंपस में चल रही हैं। सभी के भवन निर्माणाधीन हैं। इसी साल सभी को नए भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। स्टाफ की तैनाती लखनऊ स्तर से ही होती है। उपलब्ध स्टाफ में ही हम बेहतर प्रशिक्षण देने का प्रयास करते हैं। इन दिनों कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को स्टाईपेंड पर कंपनियों में नौकरी दिलाने में भी आईटीआई प्रशासन अपना योगदान दे रहा है। हाल ही में 42 युवाओं को आईटीआई कैंपस में साक्षात्कार के बाद एक कंपनी में जॉब दिया गया है।
- राजीव कुमार, प्रधानाचार्य राजकीय आईटीआई, बदायूं
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