मुजरिया (बदायूं)। अश्व प्रजाति के पशुओं की खतरनाक बीमारी ग्लैंडर फारसी का प्रकोप जिले में फिर फैल गया है। क्षेत्र के गांव कोल्हाई में पुष्टि के बाद पशुपालन विभाग और ब्रुक इंडिया टीम ने दो घोड़ों में इस बीमारी के लक्षणों की पुष्टि के बाद उन्हें जहर का इंजेक्शन देकर मारा और फिर गहराई में दफना दिया। इस दौरान टीम को घोड़ा मालिकों का विरोध झेलना पड़ा।
सहसवान के गांव कोल्हाई निवासी धर्मेंद्र सिंह का घोड़ा और रामरहीस की घोड़ी में ग्लैंडर फारसी बीमारी के लक्षण दिखाई दिए। दो माह पहले घोड़ों का सीरम सेंपल जांच को एनआरसीई हिसार (हरियाणा) लैब में भेजा गया। अब रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर संयुक्त टीम ने पीडब्ल्यूडी के रोड किनारे खाली पड़ी जगह में गड्ढे खुदवाए। यहां घोड़ों को सावधानी से लाकर जहर के इंजेक्शन देकर मारा गया, बाद में दोनों को दफना दिया गया। घोड़ों को दफनाने में पशु स्वामी के परिवारीजनों ने अवरोध पैदा किया तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। घोड़े को मारने की आशंका भांपकर धर्मेंद्र अपना घोड़ा लेकर गुरुवार रात उझानी ईंट भट्ठे पर चला गया था। अधिकारियों ने जब पुलिस को इस बारे में बताया तो एसओ प्रमोद कुमार ने दो आरक्षी भेजकर घोड़ा मंगा लिया।
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पांच किमी तक फैलता है वायरस
ब्रुक इंडिया से आए अधिकारी डॉ. संजीव कुमार जौहरी ने बताया कि ग्लैंडर फारसी बहुत खतरनाक है। इसमें घोड़ों के शरीर में बड़े फोड़े निकल आते हैं। इनसे पस और खून बहने लगता है। उनकी नाक से भी लाल रंग का स्राव निकलता है। यह बीमारी मनुष्यों में भी वायरस के माध्यम से फैल जाती है। संक्रमित घोड़े से बीमारी पांच किमी की परिधि में पलने वाले घोड़े और अश्व प्रजाति के अन्य पशुओं में होने की आशंका रहती है।
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अब पांच किमी तक लिया जाएगा सैंपल
चूंकि बीमारी का प्रसार पांच किमी परिधि तक होने की आशंका होती है। ऐसे में इस परिधि में आने वाले सभी गांवों मे पल रहे घोड़ों का सैंपल लिया जाएगा। डॉ. संजीव कुमार जौहरी ने बताया कि पशुपालन विभाग के डॉ. एके सिंह की जिम्मेदारी सीरम सैंपल कराने की है। इसे हिसार लैब भेजकर जांच कराई जाएगी कि घोड़े कितने सुरक्षित हैं।
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मालिकों को मिलेगा मुआवजा
जिन घोड़ों को ग्लैंडर फारसी की बीमारी से ग्रस्त पाकर दफनाया गया है। उन्हें सरकारी कोष से पच्चीस-पच्चीस हजार रुपया मुआवजा दिया जाएगा। पशुपालन विभाग की टीम ने सभी गांव वालों से पंचनामा भरवाकर अग्रिम कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है।
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इस टीम ने की कार्रवाई
डिप्टी सीवीओ (पशुधन विकास) डॉ. दिनेश तोमर, डिप्टी सीवीओ सहसवान डॉ. एके सिंह, पशु चिकित्सक उझानी डॉ. विवेक माहेश्वरी, पशुमित्र नेत्रपाल सिंह सैलानी और ब्रुक इंडिया से डॉ. संजीव कुमार जौहरी आदि के साथ हिसार लैब से आए सीनियर टेक्निकल आफीसर सीताराम।