बदायूं। पहाड़ पर लगातार हो रही बारिश से गंगा उफनाई और बदायूं में आफत बन गई है। यहां पर चार अगस्त से गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सोमवार को गंगा का जलस्तर 163.01 मीटर पहुंच गया है। यह स्तर खतरे के निशान से 61 सेंटीमीटर अधिक है। इसी के साथ गंगा की बाढ़ ने 40 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है।
गंगा के बढ़़े जलस्तर ने तबाही मचाना शुरू कर दिया है। बाढ़ का पानी 39 गांवों में घुस गया है। इसमें से सहसवान के छह गांवों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इन गांवों को प्रशासन खाली करवा रहा है। गांव के लोगों ने तटबंध पर शरण लिया है। ऐसे ही पांच गांव पानी से चारों तरफ से घिर गए हैं। बाकी 28 गांवों में पानी लगातार बढ़ रहा है। लोग दहशत में हैं और छतों व ऊंचे स्थान पर शरण ले रहे हैं।
गंगा के खतरे का निशान 162.40 मीटर है। चार अगस्त से ही गंगा का जलस्तर इससे अधिक है। बाढ़ खंड के एक्सईन उमेश चंद्रा ने बताया कि गंगा में जलस्तर का यह अबतक का सबसे बड़ा रिकार्ड है। इससे पूर्व 2023 में सबसे अधिक जलस्तर 162.91 मीटर रिकार्ड हुआ था। उससे पहले 1985 में जलस्तर 162.79 मीटर था। इस तरह गंगा के बाढ़ ने 40 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। इसे देखते हुए तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी है। इससे पहले कभी इतना जल स्तर कछला गंगा में नहीं रहा है।
दर्जनभर जेसीबी से लगातार हो रहीं तटबंधों की मरम्मत
गंगा के पानी को फैलने से रोकने के लिए छह तटबंध बनाए गए हैं। उसमें से तीन अति संवेदनशील और तीन संवेदनशील में हैं। गंगा का पानी तटबंधों से लगातार टकरा रहा है। जहां-तहां पानी तटबंधों को नुकसान भी पहुंचा रहा है। बाढ़ खंड के अधिकारी इन तटबंधों की रात-दिन निगरानी में लगे हैं। 24 बाढ़ चौकियों पर तटबंधों की मरम्मत का सामान उपलब्ध है। वहां पर दर्जनभर जेसीबी और बड़ी संख्या में मजदूरों को लगाया गया है। अति संवेदनशील गंगा-महावा, उसहैत और उसावां तटबंधों को गंगा ने कई बार काटने का प्रयास किया लेकिन बाढ़ खंड की सक्रियता के चलते हर दो किमी पर हो रही निगरानी के चलते तत्काल मरम्मत कर दी गई।