फोटो-62, 63, 64
मुस्तफा ने मजबूत किया बदायूंनी का सिलसिला
वैदो टोला में जन्मे गुलाम मुस्तफा को पद्म विभूषण मिलने से शहर में खुशी की लहर
23 साल की उम्र में चले गए थे मुंबई, यहां रहते हैं छोटे भाई
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। सूफी संतों के इस शहर में साहित्य और संगीत का सिलसिला कभी थमा नहीं। मशहूर उपन्यासकार इस्मत चुगताई, गीतकार शकील बदायूंनी, डॉ. उर्मिलेश शंखधार, डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी और अब उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान ने सिलसिले को मजबूत किया। शहर के वैदो टोला में जन्मे और शास्त्रीय गायक गुलाम मुस्तफा को जब गणतंत्र दिवस के मौके पर पद्म विभूषण से सम्मानित करने का एलान किया गया तो शहरवासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भले ही उन्हें महाराष्ट्र की ओर से यह सम्मान दिया गया हो पर उनका जुड़ा आज भी बदायूं से है। उनके छोटे भाई रजा हुसैन अभी यहीं रहते हैं।
संगीत के रामपुर-सहसवान घराने से ताल्लुक रखने वाले गुलाम मुस्तफा खान अब करीब 87 साल के हो गए हैं। पद्म विभूषण से सम्मानित होने के बारे में उनके छोटे भाई रजा हुसैन से बात की गई। मोहल्ला वैदोटोला में रहने वाले रजा हुसैन ने कहा कि यह बदायूं के लिए बहुत बड़े गौरव की बात है। बोले-बड़े भाई गुलाम मुस्तफा खान की प्रारंभिक शिक्षा मोहल्ले के ही प्राथमिक स्कूल में हुई थी। जूनियर की शिक्षा उन्होंने घंटाघर स्थित लालालाजपत जूनियर हाईस्कूल से की। दसवीं की तालीम मिशन स्कूल से की। बताया कि भाई ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा अपने पिता से ली, वह भी एक अच्छे कलाकार थे। इसके अलावा भी कई अन्य गुरुओं से उन्होंने शिक्षा ली।
करीब 23 साल की उम्र में लखनऊ में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद मुंबई चले गए। तब से वहीं रहते हैं। भाई को पुरस्कार मिलने पर वह और उनका पूरा परिवार काफी खुश था।
लोगों ने जताई खुशी
गुलाम मुस्तफा खान को पद्म विभूषण मिलने पर शहर निवासी आमिर सुल्तानी, शहबाज हुसैन,गुड्डू अली, जयपाल, जिया उल हक, रागिब अली, दिनेश तिवारी आदि ने खुशी जाहिर की।