बदायूं। सूफी संतों के इस शहर को दुनियां में शकील बदायूंनी के नाम से जाना जाता है। इस पिछड़े शहर की पहचान अलग बने इसके लिए डीएम दिनेश कुमार सिंह ने प्रयास शुरू किए हैं। शांति, सुरक्षा, सद्भाव, शिक्षा और स्वच्छता के प्रति आम लोगों को प्रेरित करने को शहर में मुजरफ्फरनगर के चित्रकारों से दीवारों पर चित्र बनवाए गए हैं। चित्रों को देखकर लोग कहने लगे हैं कि बदायूं के लिए यह अच्छी पहल है।
किसी भी शहर की पहचान साफ-सफाई, शिक्षा और वहां की संस्कृति से होती है। हालांकि शायरों की नगरी बदायूं का नाम देश-दुनिया में जाना जाता है। फिर भी इसकी गिनती पिछड़े जिलों में होती है। डीएम दिनेश कुमार सिंह लगातार ऐसे कार्य कर रहे हैं जिनसे बदायूं की अपनी और अलग पहचान बने। प्रदेश में नजीर बने। सो उन्होंने मुजफ्फरनगर से तीन प्रसिद्ध चित्रकारों को बुलाया। तीन दिन तक यहां रहे इन चित्रकारों ने शहर के इस्लामिया इंटर कॉलेज, आरईएस के अतिथि गृह और बदायूं क्लब में शांति, सुरक्षा,सद्भाव, शिक्षा और स्वच्छता को दर्शाते हुए सुंदर पेटिंग की। जिसे हर किसी ने पसंद किया है।
जिले में कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही डीएम ने कई स्कूल-कॉलेजों का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से जब भी बात की तो जाना कि लड़के माता-पिता के रोजाना पैर छूते हैं अथवा नहीं। कई बार तो उन्होंने मोबाइल से बच्चों के अभिभावकों से बात करके जानकारी भी ली। चित्रकारों ने दीवारों पर ऐसी ही पेंटिंग की है, जिसमें बच्चे अपने माता- पिता के पैर छू रहे हैं। स्कूल जाते बच्चे भी दिखाए गए हैं। मिसाइलमैन भूतपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का फोटो भी बनवाया गया है। किस तरह हम आपस में प्रेम से रहे इसको भी फोटो के जरिए दर्शाया गया है। केंद्र और राज्य सरकार का पूरा फोकस स्वच्छता पर है, सो स्वच्छता पर आधारित कई फोटो भी दीवारों पर बनवाए गए हैं।
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अब लोकल कलाकार बनाएंगे पेटिंग
डीएम ने तीन दिन के लिए मुजफ्फरनगर से चित्रकारों को बुलाया था। उनके बनाए गए चित्रों की तरह ही अब स्थानीय पेंटर काम करेंगे। पूरे जिले में दीवारों पर नगर पालिका-नगर पंचायतें ऐसा कार्य कराएंगीं। ताकि लोगों की सोच भी बदले।
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दक्षता परीक्षा सूबे में बनी नजीर
डीएम दिनेश कुमार सिंह ने बेसिक शिक्षा के स्तर को सुधारने का बीणा उठाया। सो उन्होंने प्राइमरी-जूनियर स्कूल के बच्चों की दक्षता परीक्षा आयोजित कराई। इस परीक्षा में सफल रहे बच्चों और उनके गुरुओं के अलावा माता-पिता को भी सम्मानित कराया। सफल बच्चों को नकद पुरस्कार के साथ ही उन्हें साइकिल भी दी गई। डीएम के इस प्रयास की सभी ने सराहना की है। वहीं यह परीक्षा सूबे में नजीर भी बनी है।