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जीएसटी का दिखने असर, दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं सस्ती हुईं

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बदायूं। 15 दिन पहले लागू हुए जीएसटी का असर शहर में दिखने लगा है। मॉल में खरीदारी और रेस्टोरेंट में खाने-पीने के भुगतान पर लोगों को पहले के मुकाबले छूट का लाभ मिल रहा है। अधिकतर व्यापारी भी जीएसटी का समर्थन कर पंजीकरण करा रहें हैं। दैनिक वस्तुओं के दाम पहले के मुकाबले कम हुए है। पैकिंग वाली ब्रांडेड आइसक्रीम, आटा, चावल, दही आदि दैनिक उपयोग की वस्तुओं के रेट मामूली कम हुए हैं। शोरूम पर कपड़ों पर 30 से 40 प्रतिशत छूट का लाभ मिल रहा है। हालांकि बाजार में कई व्यापारी स्टॉक में रखा सामान पुराने रेट में बेच रहे हैं।
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ईजी डे में खरीदारी करने आए राजेश का कहना था कि उन्होंने चावल, साबुन और आटा खरीदा, इस बार पहले के मुकाबले रेट कम लिए गए। मशहूर ब्रांड के टूथपेस्ट के रेट भी कुछ कम हुए हैं। वहीं शहर का कपड़ा व्यापार जीएसटी को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति में है। कुछ कपड़ा व्यापारियों ने जीएसटी में पंजीकरण तो करा लिया लेकिन केश मेमो नहीं छपवाए हैं। ऐसे में, पुराने रेट में ही माल बेचा जा रहा हैं। इससे ग्राहकों को भी कोई असुविधा नहीं हो रही है। बिजली का सामान बेचने वाले दुकानदारों पर जीएसटी का असर खासतौर पर देखने को मिला है। केबल पर जहां पांच प्रतिशत टैक्स लगता था, वहीं अब उन्हें 28 प्रतिशत टैक्स का भुगतान करना पड़ रहा है। नया स्टॉक नहीं मिलने की वजह से पुराना मॉल बेचा जा रहा है।
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साढ़े पांच हजार ने कराया जीएसटी में पंजीकरण
जीएसटी लागू हुए महज 15 दिन हुए है। वाणिज्य कर में वैट देने वाले लगभग 5500 से अधिक व्यापारियों ने अपना एकाउंट जीएसटी में रजिस्टर्ड कर उसका लाभ लेना शुरू कर दिया है। जबकि करीब 80 नए व्यापारियों ने भी जीएसटी में पंजीकरण कराया है। ये व्यापारी आज तक किसी प्रकार का टैक्स ही नहीं देते थे।
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सेल्स टैक्स एक्स्पर्ट बोले
सेल्स टैक्स विशेषज्ञ सुमन वर्मा ने बताया कि जीएसटी लागू होने से व्यापारी और उपभोक्ता दोनों का हित है। अब व्यापारियों को जीएसटी की समझ लगभग होने लगी है। कई छोटे व्यापारियों की समस्या है, सालाना 20 लाख की सेल नहीं होने पर उन्हें डिस्ट्रीब्यूटर की ओर से माल नहीं दिया जा रहा है। सुमन ने बताया कि छोटा व्यापारी अगर जीएसटी की श्रेणी में नहीं है और इस स्थिति में उसे माल नहीं दिया जा रहा है तो वह जीएसटी में आसानी से पंजीकरण करा ले। सेल अगर 20 लाख से कम होगी तो उसे कोई भुगतान नहीं करना होगा।
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तहसील स्तर पर हो रहीं कार्यशाला
जीएसटी की बारीकियों को समझाने के लिए वाणिज्यकर कार्यालय में जीएसटी डेस्क काउंटर खोला गया है, साथ ही तहसील स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जा रहीं हैं। जिले की दातागंज, सहसवान, बिल्सी, बिसौली, ककराला तहसील में कार्यशाला चल रहीं हैं। इनमें छोटे और बड़े व्यापारियों को जीएसटी संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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जीएसटी पर बोले व्यापारी
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कपड़ा व्यापारी नवीन बतरा ने बताया कि मार्केट डाउन चल रहा है। सरकार की मंशा के मुताबिक जीएसटी में पंजीकरण तो करा लिया लेकिन जीएसटी की बारीकियों की पूरी जानकारी अब तक नहीं हो सकी है। पुराने रेट में ही ग्राहकों को कपड़ा दिया जा रहा है।
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फोटा-17
किराना व्यापारी विजय का कहना था कि स्टॉक में रखा हुआ माल पुराने रेट मे बेच रहे हैं। नया माल आने पर जीएसटी का असर दिखाई देगा। कम सेल होने की वजह से जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया है। आईसक्रीम, दूध सहित कई किराने का सामान जीएसटी लागू होने के बाद सस्ते हो गए है।
फोटो-18
साइकिल और इलेक्ट्रॉनिक आइटम के होलसेल विक्रेता राजीव का कहना है कि जीएसटी में पंजीकरण होने के बाद उन्होंने केश मेमो छपवा लिए हैं, लेकिन ग्राहक जीएसटी का भुगतान नहीं करना चाहता है लेकिन आने आने वाले समय में लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
फोटो-19
वी-मार्ट में खरीदारी करने पत्नी रजनी के साथ पहुंचे राहुल ने कहा कि जीएसटी लागू होने से जेब पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। पहले वेट टैक्स देना पड़ता था, अब जीएसटी देना पड़ रहा है। वी-मार्ट में डिस्काउंट जीएसटी से पहले भी था और अब भी है लेकिन अब बढ़ा है। फोटो-20
इंद्रा चौक स्थित रेस्टोरेंट में पति के साथ लंच करने पहुंची रजनी ने बताया कि उनको लगता है कि जीएसटी लागू होने से दैनिक जरूरत की चीजें पहले के मुकाबले सस्ती हो गई है। रेस्टोरेंट में भी खाने-पीने का बिल पहले के मुकाबले कम करना पड़ता है।
फोटो-15
बिजली सामान के होलसेल विक्रेता प्रवीन ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद बाजार में रौनक खत्म हो गई है। महंगाई के चक्कर में सेल कम है। बिजली का तार सहित कई सामान पहले पहले के मुकाबले महंगा हुआ है। स्टॉक में रखा माल पुराने रेट में बेचना पड़ रहा है।
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