उझानी (बदायूं)।
मंडी समिति गेट के आसपास इलाके में सावन महीना में भोले के श्रृंगार के सामान की दुकानों को लेकर अभी से उठापटक शुरू हो गई है। पिछले सात-आठ साल से जिस जगह बाजार गुलजार होता रहा, वह स्थान पीडब्ल्यूडी के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन कुछ लोग अपने बलबूते दुकानें आवंटित करते रहे। ऐसे लोगों ने आर्थिक फायदा भी उठाया। पीडब्ल्यूडी की हद में बाजार सजाने के लिए दुकानदारों को क्या फिर से अवैध शुल्क देना पड़ेगा या नहीं, इसे लेकर पसोपेश बना हुआ है।
बरेली-मथुरा हाईवे पर भोले के श्रृंगार की कोई दो-चार नहीं बल्कि दर्जनों की संख्या में दुकानें लगती रही हैं। बदायूं से चलकर कछला तक सेंटर प्वाइंट कहे जाने वाले मंडी समिति के आसपास के इलाके में हर साल ही लगने वाली दुकानों की असलियत पर गौर करें तो कोई व्यक्ति या फिर किसी भी विभाग की ओर से दुकानें आवंटित नहीं की जा सकतीं। वजह साफ है कि अस्थायी दुकानों को पीडब्ल्यूडी की खाली पड़ी जमीन पर लगाया जाता है। इस बार किस की दुकान कहां लगेगी, पसोपेश के बीच चार दिन पहले कई दावेदार मंडी परिसर में जुटे। मनमाफिक जगह का चयन करने के लिए उन्होंने बोली भी लगाई। बोली की रकम कौन रखेगा या फिर किसी संस्था के खाते में जमा होगी, यह भी साफ नहीं हो पाया। दुकानों को लेकर चल रही उठापटक के बीच जानकारों की मानें तो फिलहाल कोई भी खुद को जवाबदेह बनाने में दिलचस्पी नहीं रखता। मामला संज्ञान में आते ही मंडी सचिव क्षेत्रपाल सिंह ने हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने गेंद एसडीएम सदर को अवगत कराके गेंद भी उन्हें के पाले में फेंक दी है।
इंसेट
कछला तिराहे पर सजती हैं दुकानें
उझानी। मंडी समिति गेट ही नहीं बल्कि यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर कछला तिराहे पर भी शिवभक्तों के लिए दुकानें लगती हैं। तिराहे पर दुकानों को न तो नगर पंचायत प्रशासन उठाता है और न ही जिला पंचायत की ओर से आवंटित की जाती हैं। बताते हैं कि कछला तिराहे पर भी कमोवेश मंडी गेट जैसा होता रहा है।
वर्जन
मामला मेरे संज्ञान में है। सड़क किनारे की खाली जमीन पीडब्ल्यूडी के अधिकार क्षेत्र में है। दुकानें लगेंगी या नहीं, यह पीडब्ल्यूडी के अफसर ही जानें लेकिन मैंने मंडी सभापति होने के नाते एसडीएम सदर को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है।
- क्षेत्रपाल सिंह, मंडी सचिव