बदायूं। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सुधर नहीं रही हैं। जिला महिला अस्पताल में बने एसएनसीयू के हालात और ज्यादा खराब हैं। यहां भर्ती होने वाले नवजात को स्टाफ के सहारे छोड़ दिया जाता है। किसी की हालत ज्यादा गंभीर होने पर डॉक्टर को बुलाया जाता है।
एसएनसीयू (सघन नवजात चिकित्सा उपचार इकाई) एक ऐसा केंद्र है, जहां जन्म के तुरंत बाद नवजात हालत देखकर भर्ती किए जाते हैं। एसएनसीयू की बिल्डिंग भी दूर नहीं है, यह महिला और सीएमओ कार्यालय के बराबर में बनी है। यहां वही नवजात भर्ती किए जाते हैं, जो जन्म के बाद कमजोर दिखते हों, उनका वजन कम हो, रंग नीला हो, सांस लेने में दिक्कत, पेट फूल रहा हो। महिला अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात के लिए इन वॉर्न यूनिट बना है और स्वास्थ्य केंद्रों पर जन्म लेने बच्चों को आउट वॉर्न यूनिट में रखा जाता है। यानि बच्चे को मां से अलग कर दिया जाता है। उनके उपचार और देखभाल की जिम्मेदारी एसएनसीयू की होती है। अगर कोई बच्चे को देखना चाहे तो दूर से देख सकता है। किसी भी यूनिट में बाहरी व्यक्ति का घुसना मना है। इनकी देखभाल के लिए तीनों शिफ्ट में एक-एक वार्ड आया तैनात हैं। जबकि उपचार के लिए तीन-तीन स्टाफ नर्स। यहां कमी है तो सिर्फ डॉक्टरों की, जिनके दम पर मासूमों का इलाज होता है। बच्चे स्वस्थ्य होते हैं, जिसकी वजह से उनके मां-बाप खुश होते हैं। आज उन्हीं डॉक्टरों की कमी से नवजात की जिंदगी पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक मासूम सी जान की जिंदगी सिर्फ स्टाफ नर्सों के हवाले है। डॉक्टर बुलाने के लिए कॉल भेजनी पड़ती है। यहां वह डॉक्टर तैनात हैं, जिन्हें ओपीडी से फुर्सत नहीं मिल पाती। समय मिलता है तो वह एसएनसीयू पहुंचते हैं। बाकी रात के समय मासूमों की जान भगवान भरोसे रहती है।
स्टाफ की स्थिति
-एसएनसीयू में दो डॉक्टर तैैनात हैं। इनमें डॉ. राजीव कुमार रोहतगी इस समय मौजूद हैं। जबकि डॉ. हनीश चावला पत्नी की डिलीवरी के बाद से अवकाश पर हैं। जबकि स्टाफ नर्स प्रीति, रजनी और विनीता सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक, स्टाफ नर्स सबा, वंदना, सुधा दो बजे से रात आठ बजे तक और एकता, मीनू, ज्योति रात में तैनात हैं। इसी तरह वार्ड आया कंचन सुबह, निलोफर दोपहर और रात में वबीता रहती हैं। एक सफाई कर्मचारी है। सुबह शाम आता है, बाकी समय कॉल पर बुलाना पड़ता है।
एसएनसीयू में बने इन वॉर्न यूनिट में आठ बच्चों को भर्ती किया जा सकता है परंतु इस समय सिर्फ तीन बच्चे भर्ती हैं। इनमें सम्राट अशोक नगर निवासी नीलम पत्नी संजय का बच्चा गंभीर हालत में है। जबकि वजीरगंज के गरगईया निवासी आरती पत्नी विपिन और सिविल लाइंस के ग्राम मझिया निवासी कविता पत्नी रनवीर के बच्चों की हालत में सुधार है।
आउट वॉर्न यूनिट में एक साथ छह बच्चों का इलाज हो सकता है। परंतु इस समय दो बच्चे भर्ती हैं। इस यूनिट में वही बच्चे भर्ती होते हैं, जो स्वास्थ्य केंद्रों पर जन्म लेते हैं। इनमें ग्राम चिंजरी निवासी मानवती पत्नी पुष्पेंद्र और उझानी के ज्योरा पारवाला निवासी नाजिश पत्नी कय्यूम के बच्चों की स्थिति गंभीर है। डॉक्टर ने हालत नियंत्रण में बताई है।
रात को भगवान भरोसे रहता है एसएनसीयू
महिला अस्पताल में स्थित एसएनसीयू की वैसे भी हालत खराब है। ऊपर से डॉक्टरों की कमी और दूसरे रात को पूरा एसएनसीयू भगवान भरोसे रहता है। पूरा एसएनसीयू स्टाफ नर्सों के हवाले रहता है। ऐसी हालत में मासूमों के साथ क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।
एसएनसीयू में नियमित रूप से डॉ. हनीश चावला को लगाया है। अगर वह अवकाश पर हैं, तो मुझे जानकारी नहीं है। उन्होंने महिला अस्पताल की सीएमएस से अवकाश लिया होगा। बाकी डॉक्टरों की कमी है। कोई नया डॉक्टर यहां आए तो हम उसे एसएनसीयू में तैनात करें। -डॉ. आशाराम, सीएमओ